सीता अष्टमी 2023: इन उपायों से मिलेगा भगवान श्री राम और माता सीता का आशीर्वाद!

सीता अष्टमी 2023: हिंदू धर्म में प्रत्येक देवी-देवता के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए एक दिन अवश्य समर्पित होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सीता अष्टमी के दिन माता सीता का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन को प्रतिवर्ष माता सीता के जन्मदिन या यूँ कहें कि जानकी जयंती के रूप में मनाया जाता है। एस्ट्रोसेज का यह विशेष ब्लॉग आपको सीता अष्टमी के बारे में समस्त जानकारी प्रदान करेगा जो कि 14 फरवरी 2023 को मनाई जाएगी। इस ब्लॉग में हम सीता अष्टमी की तिथि, समय और  इस दिन किये जाने वाले अनुष्ठानों के बारे में विस्तार से बताएंगे। 

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हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सीता अष्टमी मनाई जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन मां सीता ने धरती पर जन्म लिया था। इस दिन माता सीता और भगवान राम की पूजा विधि-विधान से की जाती है। सीता अष्टमी के अलावा अन्य महत्वपूर्ण पर्व एवं त्योहार जैसे मासिक कालाष्टमी, विजया एकादशी, शनि प्रदोष और महाशिवरात्रि आदि भी फरवरी के महीने में बेहद धूमधाम से मनाये जाएंगे। साथ ही, इस माह सूर्य मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे और शनि देव के साथ युति करेंगे। ऐसे में, यह दिन बेहद ख़ास होने वाला है क्योंकि कुंभ राशि में शनि और सूर्य की युति तकरीबन 30 साल बाद होने जा रही है। सूर्य और शनि की युति कई मायनों में महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इसका असर राशिचक्र की सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। 

सीता अष्टमी 2023 का मुहूर्त: सीता अष्टमी के दिन माता सीता की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का आरंभ 13 फरवरी 2023 को सुबह 09 बजकर 50  मिनट पर होगा और इसका अंत 14 फरवरी 2023 की सुबह 09 बजकर 07 मिनट पर होगा। हालांकि, उदय तिथि के अनुसार, सीता अष्टमी का पर्व 14 फरवरी 2023 को अनुराधा नक्षत्र के तहत मनाया जाएगा। इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और माता सीता की विधिवत पूजा की जाती है और इस दिन व्रत रखने से महिलाओं को एक सुख-शांति से पूर्ण जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

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सीता अष्टमी पर कैसे करें पूजा?

विवाहित महिलाओं के लिए सीता अष्टमी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गयी है। इस दिन प्रातः काल स्नान के बाद भगवान गणेश और माँ दुर्गा की पूजा के साथ दिन की शुरुआत करनी चाहिए। माता सीता को पीले फूल, पीले वस्त्र और अन्य सामग्री अर्पित करें। ये सभी सामग्री अर्पित करने के बाद मां सीता की आरती करें और आरती समाप्त होने के बाद “श्री जानकी रामाभ्यां नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके पश्चात, गुड़ से बनी मिठाई का भोग माता सीता और राम जी को लगाएं और संध्या के समय किये जाने वाले भोजन से पहले इस प्रसाद का सेवन करें। इस दिन कपड़े या गुड़ से बनी चीज़ों का दान करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है।

सीता अष्टमी का महत्व

विवाहित महिलाओं के लिए इस दिन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा व्रत करने से और माँ सीता एवं भगवान राम की पूजा करने से शादीशुदा जीवन में चल रही सभी समस्याओं का समाधान होता है। साथ ही, खुशहाल वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि यदि किसी महिला का पति सीता अष्टमी का व्रत करता है तो उसे दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। 

इसके विपरीत, यदि कुंवारी कन्याएं सीता अष्टमी का उपवास करती हैं तो उनके विवाह के मार्ग में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं। यदि आप किसी को पसंद करते हैं और उनसे ही विवाह करना चाहते हैं तो आपको श्री राम और सीता जी के आशीर्वाद से मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। 

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सीता अष्टमी के दिन करें ये अचूक उपाय  

विवाहित महिलाओं को राम जी और माता सीता के ऐसे चित्र का पूजन करना चाहिए जिसमें वे दोनों एक साथ बैठे हों। इसके बाद, मां सीता की मांग में 7 बार सिंदूर लगाएं और उसके बाद उसी सिन्दूर से 7 बार अपनी मांग भरें।  मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और माता सीता की जोड़ी को वैवाहिक जीवन के लिए आदर्श माना जाता है इसलिए वैवाहिक जीवन से सभी समस्याओं को दूर करने के लिए श्रीराम संग माता सीता का चित्र लगाएं।कुंवारी कन्याओं को तुलसी के पौधे की मिट्टी से बनी राम जी और सीता जी की मूर्ति की पूजा करनी चाहिए। वैवाहिक जीवन में उत्पन्न परेशानियों के अंत या फिर सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए “श्री जानकी रामाभ्यां नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।  

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