सूर्य ने बदला नक्षत्र, यह परिवर्तन मचाएगा उलटफेर: देश-दुनिया और आपकी राशि पर क्या पड़ेगा असर?

ज्योतिष में ग्रहों के गोचर को विशेष महत्व दिया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रहों का गोचर हमारे जीवन को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। फिर किसी ग्रह का गोचर राशि में हो रहा हो या नक्षत्र में इन दोनों को ही ज्योतिष के जानकार महत्वपूर्ण और आम जनजीवन को प्रभावित करने वाला बताते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि हमारे जीवन में होने वाली सभी प्रमुख घटनाएं ग्रहों की चाल के ऊपर निर्भर करती हैं।

ऐसे में ग्रहों का हर एक परिवर्तन हमारे जीवन में कुछ ना कुछ बड़े या छोटे बदलाव लेकर अवश्य आता है। इसी कड़ी में बात करें सूर्य ग्रह की जिसे ग्रहों के राजा का दर्जा प्राप्त है वह जुलाई में जहां 16 तारीख को कर्क राशि में गोचर करेगा वहीं 20 तारीख को पुष्य नक्षत्र में भी गोचर कर जाएगा।

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सवाल उठता है कि, आखिर पुष्य नक्षत्र में सूर्य का यह गोचर इतना महत्वपूर्ण क्यों है? तो दरअसल जहां एक तरफ सूर्य को सभी ग्रहों का राजा कहा जाता है तो वहीं सभी नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को राजा का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में 20 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेंगे। ऐसे में स्वाभाविक है कि सभी 12 राशियों पर इसका कुछ ना कुछ प्रभाव अवश्य देखने को मिलेगा।

सूर्य नक्षत्र परिवर्तन:  समय और अवधि

जैसा कि हमने पहले भी बताया कि सूर्य का यह नक्षत्र परिवर्तन 20 जुलाई को होने जा रहा है और उसके बाद 3 अगस्त तक सूर्य इसी नक्षत्र में ही रहेंगे। समय की बात करें तो बुधवार, 20 जुलाई 2022 को सुबह 11 बजकर 03 मिनट पर होगा और इसके बाद बुधवार, 03 अगस्त 2022 को सुबह 09 बजकर 51 मिनट पर सूर्य अगले नक्षत्र में गोचर कर जाएंगे। 

सूर्य के पुष्य नक्षत्र में गोचर के दौरान सूर्य दक्षिणायन रहने वाले हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि सूर्य जब दक्षिणायन होते हैं तो यह समय आपकी देवताओं के मध्याह्न काल के आरंभ का प्रतीक होती है। उसके बाद मकर संक्रांति तक सूर्य दक्षिणायन ही रहने वाले हैं। 

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सूर्य के नक्षत्र गोचर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

सूर्य की ही तरह पुष्य नक्षत्र को भी बेहद ही शुभ माना जाता है। इसके अलावा कोई भी शुभ कार्य करने के लिए पुष्य नक्षत्र को सबसे उत्तम नक्षत्र की श्रेणी दी गई है। यही वजह है कि जब पुष्य नक्षत्र होता है तो लोग बेझिझक बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य कर लेते हैं। इसी कारण के चलते पुष्य नक्षत्र का लोग इंतजार करते हैं। खरीदारी के लिए भी पुष्य नक्षत्र को बेहद शुभ माना जाता है। पुष्य नक्षत्र को शास्त्रों में पोषण करने वाला, ऊर्जा, और शक्ति प्रदान करने वाला नक्षत्र माना गया है।

साथ ही पुष्य नक्षत्र का राशि स्वामी चंद्रमा होता है और यह कर्क राशि के अंतर्गत आता है। सूर्य के पुष्य नक्षत्र में गोचर की अवधि के दौरान सूर्य कर्क राशि में ही रहने वाले हैं। ऐसे में ज्योतिष की दृष्टि से यह नक्षत्र गोचर बेहद ही महत्वपूर्ण प्रभावशाली और अहम माना जा रहा है।

पुष्य नक्षत्र के बारे में यह जानकारी जानते हैं आप? ज्योतिष के जानकार मानते हैं कि पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव, अधिष्ठाता बृहस्पति देव होते हैं। ऐसे में इस नक्षत्र में खरीददारी इसलिए शुभ मानी गई है क्योंकि शनि के प्रभाव से पुष्य नक्षत्र के दौरान खरीदी गई वस्तुएं व्यक्ति के जीवन में स्थाई रूप से और लंबे समय तक बनी रहती है। साथ ही गुरु के प्रभाव से व्यक्ति को समृद्धि भी प्राप्त होती है। सभी नक्षत्रों में इसीलिए पुष्य नक्षत्र को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस अति शुभ नक्षत्र में यदि कोई काम किया जाए तो वह बेहद फलदाई साबित होता है।

सूर्य का पुष्य नक्षत्र में गोचर देश दुनिया में आएंगे क्या बदलाव

सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन से सामाजिक, राजनैतिक, और भौगोलिक ढेरों बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राजनीति से जुड़े लोगों के लिए यह समय महत्वपूर्ण साबित होगा। इस समय अवधि में सत्ता पक्ष पर दबाव देखने को मिल सकता है। मौसम में भारी बदलाव के चलते कहीं कहीं ज्यादा वर्षा के चलते बाढ़ की स्थिति बनने की आशंका बन रही है। कृषि में अच्छी पैदावार होने के शुभ संकेत मिल रहे हैं।

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सूर्य का पुष्य नक्षत्र में गोचर: राशि अनुसार भविष्यफल

मेष राशि: यह समय आपके लिए अनुकूल रहेगा। पारिवारिक जीवन में रिश्ते सौहार्दपूर्ण बने रहेंगे। कार्यस्थल पर परिस्थितियों में सुधार आएगा। स्वास्थ्य संबंधित कोई भी परेशानी के लिए तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।

वृषभ राशि: व्यवसाई जातकों को सफलता मिलेगी, समाज में मान प्रतिष्ठा बढ़ेगी, हालांकि स्वास्थ्य पक्ष थोड़ा नाजुक रहने वाला है। इस दौरान आपको पेट और आंत से जुड़ी समस्या हो सकती है।

मिथुन राशि: यह समय अवधि आपके लिए कुछ खास अनुकूल नहीं कही जा सकती है। इस दौरान आपके मन में किसी बात को लेकर डर बना रहेगा, धार्मिक श्रद्धा में कमी देखने को मिलेगी, इसके अलावा स्वास्थ्य संबंधित परेशानी भी आपको दिक्कत में डाल सकती है।

कर्क राशि: आर्थिक लाभ होने के प्रबल संकेत मिल रहे हैं। इस दौरान आपको भाग्य का साथ मिलेगा, भाई बहनों से रिश्ते सुधरेंगे, प्रेम जीवन शानदार रहेगा। कुल मिलाकर आपके लिए यह समय बेहद ही अनुकूल रहने वाला है।

सिंह राशि: पारिवारिक जीवन अनुकूल रहेगा। इस दौरान आप किसी व्यावसायिक यात्रा पर जा सकते हैं जिससे आपको लाभ मिलेगा। हालांकि स्वास्थ्य संबंधित कोई भी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

कन्या राशि: इस अवधि में आपकी इच्छा शक्ति में वृद्धि होगी, कला और संस्कृति के प्रति आपका रुझान रहने वाला है, समृद्धि के प्रबल योग बन रहे हैं, साथ ही आपको स्वास्थ्य का भरपूर समर्थन भी मिलेगा।

तुला राशि: तुला राशि के लिए यह समय उठापटक वाला रहने वाला है। इस दौरान आपको विरोधियों से परेशानी हो सकती है, मानसिक तनाव की आशंका है। हालांकि दूसरी तरफ आपको आर्थिक लाभ होगा और पारिवारिक जीवन भी अनुकूल बना रहेगा।

वृश्चिक राशि: इस दौरान आपको सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे, धन प्राप्ति के भी योग बन रहे हैं, दोस्तों परिवार के लोग आपका समर्थन करेंगे। हालांकि स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां दिक्कत में डाल सकती हैं।

धनु राशि: आप धार्मिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे, साथ ही कोई महत्वपूर्ण फैसला भी लेने में आप कामयाब रहने वाले हैं, पारिवारिक जीवन अनुकूल रहेगा, कार्यक्षेत्र पर थोड़ी उठापटक का सामना करना पड़ सकता है।

मकर राशि: व्यवसाय से जुड़े जातक नई परियोजनाओं पर अमल कर सकते हैं, आर्थिक फैसले आपके पक्ष में रहने वाले हैं, आप कहीं घूमने जाने की योजना बना सकते हैं, साथ ही इस दौरान आपका झुकाव धार्मिक कार्यों के प्रति ज्यादा रहेगा।

कुंभ राशि: आर्थिक लेनदेन के दौरान आपको ज़्यादा सावधान रहने की सलाह दी जाती है। इस दौरान यात्रा बहुत जरूरी ना हो तो ना ही करें। किसी वाद विवाद में ना पड़े और जितना हो सके शांति बनाए रखें।

मीन राशि: मीन राशि के जातकों को इस समयावधि में सफलता प्राप्त करने के लिए ज्यादा कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता पड़ेगी। इसके अलावा आप अपने भविष्य को लेकर कोई महत्वपूर्ण फैसला ले सकते हैं। जीवन साथी के साथ आपके रिश्ते अनुकूल बने रहेंगे और आप दोनों एक दूसरे को आगे बढ़ने में मदद करेंगे।

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पुष्य नक्षत्र की विशेषताएं

सभी 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र आठवें स्थान पर आता है। इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह का दर्जा शनि ग्रह को प्राप्त है। इसके अलावा पुष्य नक्षत्र को पोषण, ऊर्जा देने वाला ग्रह माना जाता है। जब सूर्य पुष्य नक्षत्र में आते हैं तो इन दोनों के संगम को चीजों को पोषित करने में सहायक माना गया है 

पुष्य नक्षत्र कर्क राशि में डिग्री 3:20-16:40 तक होता है और इसे महा नक्षत्र या अत्यधिक शुभ नक्षत्र के रूप में भी जाना जाता है।

प्रतीक: गाय, तीर, फूल

नक्षत्र स्वामी : शनि

राशि: कर्क राशि

देवता: हनुमान

प्रकृति: प्रकाश

गण: देव

लकी स्टोन: ब्लू सेफायर

शुभ रंग : लाल

भाग्यशाली अंक: 8

तत्व: जल

दोष: पित्त

पक्षी का नाम: समुद्री कौआ

योनि/पशु प्रतीक: अजा (बकरी)

पेड़: अश्वथा वृक्ष / पीपल

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आप भी पुष्य नक्षत्र में जन्मे हैं तो इन बातों का रखें विशेष ख्याल 

पुष्य नक्षत्र में जन्मे लोगों पर देवी-देवताओं की विशेष कृपा होती है।ऐसे जातक अन्य लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे और तत्पर नजर आते हैं। स्वभाव में यह बेहद ही धार्मिक, बलवान, कृपालु, धनी, और ढेरों कलाओं के धनी होते हैं। पुष्य नक्षत्र में जन्मे लोगों पर टोने-टोटके का असर नहीं होता है। इसके अलावा इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली महिलाएं बेहद ही प्रभावशाली मानी जाती है। 

हालांकि चूंकि पुष्य नक्षत्र को भगवान से श्राप मिला था जिसके चलते इस नक्षत्र में पाणिग्रहण संस्कार नहीं किए जाते हैं। 

वहीं इसके विपरीत पुष्य नक्षत्र में जप, तप, दान, शुभ कर्म जैसे धार्मिक कार्य करना शुभ माना गया है। पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातकों पर माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है। ऐसे में इस शुभ योग में लक्ष्मी स्त्रोत, कनकधारा स्त्रोत, का पाठ करने से माँ लक्ष्मी की कृपा व्यक्ति को जीवन में प्राप्त होती है और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

पुष्य नक्षत्र के उपाय

वैदिक ज्योतिष के अनुसार कहा जाता है कि यदि किसी व्यक्ति का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ है और उनकी कुंडली में यह नक्षत्र हानिकारक या फिर कमजोर स्थिति में है तो ऐसे जातकों को पुष्य नक्षत्र को मजबूत करने के लिए कुछ उपाय करने चाहिए। क्या हैं वो उपाय आइए जान लेते हैं: 

नियमित रूप से गाय की सेवा करें। स्यबह-सुबह गाय को ताज़ी रोटियां और हरा चारा खिलाएं। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें। ‘ॐ बृहस्पतए नमः’ मंत्र का जाप करें। अपने जीवन में पीले, सफेद, और नारंगी रंग के वस्त्र शामिल करें। देवी अदिति की पूजा करें। भगवान विष्णु की पूजा करें।

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