12 साल बाद गुरु के गोचर से बनेगा विपरीत राजयोग, तुला सहित 5 राशि वालों को मिलेगा भर-भर कर पैसा!

वैदिक ज्योतिष में सभी ग्रहों का विशेष महत्व होता है। इनकी चाल में होने वाले परिवर्तन से व्यक्ति के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। गुरु ग्रह जो कि बुद्धिमता, समृद्धि और धार्मिक कार्य के कारक हैं और यह जिस राशि में प्रवेश करते हैं वहां प्रगति लेकर आते हैं। यह 12 साल बाद मेष राशि में गोचर करने जा रहे हैं। गुरु गोचर के कारण विपरीत राजयोग का भी निर्माण हो रहा है। एस्ट्रोसेज का यह विशेष ब्लॉग आपको गुरु के गोचर के बारे में सभी जानकारी प्रदान करेगा। साथ ही, इस गोचर से बनने वाले शुभ योग से भी आपको अवगत कराएंगे। तो आइये बिना देर किये जानते हैं किन राशियों के लिए यह योग फलदायी साबित होगा। 

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गुरु का मेष राशि में गोचर: समय व तिथि

देवताओं के गुरु बृहस्पति 22 अप्रैल 2023 की 03 बजकर 33 पर अपनी स्वराशि मीन राशि से निकलकर अपनी मित्र राशि मेष राशि में प्रवेश करेंगे और इस राशि में यह 1 मई तक रहेंगे। खास बात यह है कि इस गुरु गोचर के कारण विपरीत राजयोग का भी निर्माण होगा जो कुछ राशियों के लिए फलदायी साबित होगा। 

ज्योतिष में गुरु ग्रह का महत्व

वैदिक ज्योतिष में गुरु को बृहस्पति और देवगुरु के नाम से भी जाना जाता है। यह धनु और मीन राशि के स्वामी हैं और कर्क राशि इनकी उच्च राशि है जबकि मकर राशि नीच राशि कही जाती है। नक्षत्रों की बात करें तो 27 नक्षत्रों में बृहस्पति को पुनर्वसु, विशाखा, और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामित्व प्राप्त है। यह ज्ञान, शिक्षक, संतान, बड़े भाई, शिक्षा, धार्मिक गतिविधि, समृद्धि आदि के कारक हैं। इनके मित्र ग्रह सूर्य, चन्द्र, मंगल हैं जबकि बुध, शुक्र से इनकी शत्रुता हैं। गुरु के साथ शनि सम भाव रखते हैं। गुरु के प्रभाव से व्यक्ति बैंक, आयकर, राजस्व, कानूनी क्षेत्र, जज, न्यायालय, वकील, संपादक, रहस्य विज्ञान, फिल्म निर्माण, हलवाई, पनवाड़ी, वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता होता है।

यदि कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत स्थिति में होते हैं, तो व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलता है। वह जिस काम में हाथ डालता है वह पूर्ण रूप से सफल होता है, विवाह भी समय से होता है और शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यक्ति खूब तरक्की करता है। जबकि गुरु ग्रह कमजोर होने पर विवाह में देरी का सामना करना पड़ सकता है, काम में असफलता और जीवन में निराशा जैसी नकारात्मकता बढ़ती हैं।

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वैज्ञानिक दृष्टि से गुरु का महत्व

वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो बृहस्पति ग्रह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह माना जाता है। इसका तापमान 145 डिग्री सेल्सियस है इसलिए यह बहुत ही ठंडा ग्रह होता है। यह हीलियम और हाइड्रोजन गैस से बना है। बृहस्पति ग्रह को सौरमंडल का ‘वैक्यूम क्लीनर’ भी कहा जाता है क्योंकि यह पृथ्वी की विनाशकारी चीज़ों से रक्षा करता है।

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मिथुन राशि

बृहस्पति आपकी राशि के जातकों के लिए सातवें और दसवें भाव के स्वामी हैं। बृहस्पति महाराज आपकी मिथुन राशि से एकादश भाव में गोचर करेंगे। इस गोचर के कारण बन रहे विपरीत राजयोग का शुभ प्रभाव मिथुन राशि के जातकों पर पड़ेगा। इसके परिणामस्वरूप आपकी आय में वृद्धि होगी। जिन लोगों का व्यापार है उन्हें इस दौरान मुनाफा होगा। वहीं नौकरी करने वालों को इस दौरान अच्छी पदोन्नति मिलने के योग बनेंगे।

कर्क राशि

देव गुरु बृहस्पति आपके नौवें भाव और छठे भाव के स्वामी हैं। इस गोचर से बनने वाला विपरीत राजयोग कर्क राशि के जातकों को असीम धन-धान्य और वैभव से पूर्ण जीवन प्रदान करेगा। यदि आप कोई व्यापार करते हैं तो उस व्यापार में बड़ा बदलाव या व्यापार बदलने में आपको सफलता मिलेगी। वहीं यदि आप नौकरीपेशा हैं तो इस दौरान आपको कई बेहतर मौके प्राप्त हो सकते हैं।

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कन्या राशि

देव गुरु बृहस्पति का गोचर कन्या राशि के आठवें भाव में होगा। देव गुरु बृहस्पति आपके चौथे और सातवें भाव के स्वामी हैं। मेष राशि में गुरु गोचर से बनने वाले विपरीत राजयोग का शुभ प्रभाव कन्या राशि के जातकों पर भी पड़ेगा। इस अवधि में आपको हर काम में सफलता प्राप्त होगी। साथ ही दाम्पत्य जीवन में जीवनसाथी के साथ संबंध अच्छे और मजबूत होंगे और आपके मान-सम्मान में वृद्धि के योग भी बनेंगे।

तुला राशि

देव गुरु बृहस्पति आपके तीसरे और छठे भाव के स्वामी हैं और यह आपके सातवें भाव में गोचर करेंगे। तुला राशि के जातकों के लिए इस गोचर से बन रहा विपरीत राजयोग बेहद लाभदायक रहने वाला है। इस अवधि में पहले से अटके हुए कार्य पूरे होंगे। आपको नौकरी में पदोन्नति मिलने के प्रबल योग बनेंगे और आप अपने काम का लोहा मनवा पाएंगे। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती जाएगी।

मीन राशि

देव गुरु बृहस्पति मीन राशि के स्वामी हैं। यह आपके दशम भाव के स्वामी ग्रह भी हैं और बृहस्पति का यह गोचर आपकी राशि से दूसरे भाव में होगा। गुरु गोचर के कारण बन रहे विपरीत राजयोग का शुभ प्रभाव मीन राशि के जातकों पर भी पड़ेगा। इस अवधि आपके लिए धन लाभ के योग बनेंगे। वहीं जो लोग खुद का व्यवसाय कर रहे हैं उन्हें इस दौरान अच्छा मुनाफा हो सकता है। साथ ही आप अपने कार्यस्थल पर मान-सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे।

बृहस्पति ग्रह के ज्योतिषीय उपाय

कुंडली में गुरु की कमजोर स्थिति होने पर जातक को गुरुवार के दिन व्रत करना चाहिए। साथ ही इस ​दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए। गुरु को मजबूत करने के लिए ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:’ मंत्र का जाप करें।यदि आपके कुंडली में गुरु की स्थिति कमज़ोर है तो भोजन में चने के बेसन, चीन और घी से बने लड्डू का सेवन करना चाहिए।गुरु ग्रह को प्रबल करने के लिए आप अपनी सामर्थ्य अनुसार शहद, पीले वस्त्र, फूल, हल्दी, पुस्तक, पुखराज, सोना आदि का दान कर सकते हैं।कुंडली में गुरु कमज़ोर स्थिति में हैं तो इसके लिए पुखराज रत्न धारण कर सकते हैं लेकिन इसके लिए ज्योतिषी की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।इसके अलावा अपने माता-पिता, गुरु और बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए।

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