Badrinath Yatra 2023: आज से खुल गए बद्रीनाथ मंदिर के कपाट, इस धाम पर जाने से पहले जरूर पढ़ें ये 7 बड़ी बातें

सनातन पंरपरा से जुड़े चार धामों में से एक भगवान बद्रीनाथ मंदिर के कपाट आज पूरे छह महीने के बाद एक बार फिर से उनके भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गये हैं. भगवान बद्री विशाल का यह मंदिर न देश के प्रमुख विष्णु मंदिरों में से एक है, जहां पर हर हिंदू अपने जीवनकाल में एक बार जरूर जाकर दर्शन और पूजन करना चाहता है. यही कारण है कि मंदिर के कपाट खुलते ही इस धाम की ओर तीर्थयात्रियों का सैलाब उमड़ पड़ा है. भगवान बद्रीनाथ के इस मंदिर के कपाट खुलने और बंद होने तथा पूजा विधि की अपनी एक विशेष परंपरा है जो इस मंदिर को और भी खास बनाती है. आइए बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े 7 बड़े रोचक रहस्य के बारे में विस्तार से जानते हैं.

भगवान बद्रीनाथ का मंदिर उनके भक्तों के दर्शन के लिए ​साल में सिर्फ छह महीनों के लिए खुलता है और भारी बर्फबारी के चलते पूरे छह महीनों तक बंद रहता है.
बद्रीनाथ मंदिर के भगवान बद्री विशाल के सामने एक दीया जलता है जो कभी भी बुझता नहीं है. तब भी नहीं जब इस मंदिर को छह महीने के लिए बंद कर दिया जाता है.
भगवान ब्रदीनाथ की मूर्ति के लेप और अनवरत जलने वाले दीये के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला तेल हर साल टिहरी के राजमहल में सुहागिनों द्वारा निकाला जाता है. खास बात यह कि तेल निकालने की पूरी प्रक्रिया प्रक्रिया टिहरी की महारानी की अगुवाई में होती है.
बद्रीनाथ धाम में भगवान ब्रदी विशाल की ध्यानमुद्रा वाली मूर्ति के बारे में मान्यता है कि यह शालिग्राम शिला से बनी हुई है. जिसे कभी बौद्धों ने नारदकुंड में फेंक दिया था. लेकिन बाद में उसे आदि शंकराचार्य ने अपने योगबल से ढूढ़कर मंदिर में पुन: विधि-विधान से स्थापित करवाया था. साथ ही इसकी निरंतर पूजा-पाठ और सुरक्षा के लिए ज्योतिर्मठ की स्थापना की थी.
बद्रीनाथ धाम में भगवान श्री विष्णु की पूजा के लिए दक्षिण भारत के केरल से पुजारी आते हैं. मंदिर में पूजा का सिर्फ उन्हें अधिकार होता है. मान्यता है कि मंदिर में भगवान बद्री विशाल की पूजा का यह अधिकार शंकराचार्य ने उन्हें दिया था.
समुद्र तल से तकरीबन 3000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर विराजमान भगवान बद्रीनाथ के बारे में मान्यता है कि भविष्य में एक दिन ऐसा आएगा, जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे. जिसके बाद बद्रीनाथ धाम जाने वाला रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाएगा. इसके बाद भगवान विष्णु के भक्त अपने आराध्य का दर्शन और पूजन भविष्यबद्री नामक तीर्थ पर करेंगे.
बद्रीनाथ मंदिर जहां नर-नारायण के विग्रह की पूजा होती है, उस पावन तीर्थ के बारे में मान्यता है कि यहां पर आने वाले भक्तों को दोबारा मां के गर्भ में आकर पृथ्वी पर जन्म नहीं लेना पड़ता है. कहने का तात्पर्य यह कि वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है.

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(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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