Narad Jayanti 2023: देवर्षि नारद जयंती पर जानें उनके जीवन से जुड़ी 5 बड़ी बातें

Narad Jayanti 2023 Date: पौराणिक कथाओं के अनुसार देवर्षि नारद को सृष्टि का पहला पत्रकार कहा जाता था. उनको यह वरदान था कि वह तीनों लोकों का भ्रमण कर सकते हैं. पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की प्रतिपदा तिथि पर नारद जयंती मनाई जाती है. यह तिथि आज यानी 05 मई 2023 को मनाई जा रही है. धार्मिक नजरिए से देवर्षि नारद की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है साथ ही ज्ञान की भी प्राप्ति होती है.

ऐसा माना जाता है था कि पौराणिक काल में देवर्षि नारद पूरे ब्रह्मांड में घूमते थे और देवी-देवताओं के आदेश दैत्यों और गुरुओं तक पहुंचाते थे. वे श्री हरि के परम भक्त थे और उनकी आराधने में विलीन रहते थे. साथ ही हमेशा नारायण के नाम का जप भी करते थे. आज उनकी जयंती पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ बड़ी बातें और पूजा का शुभ मुहूर्त.

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धार्मिक मान्यता के अनुसार देवर्षि नारद भगवान विष्णु के बड़े भक्त थे. ऐसे में आज उनकी जयंती पर श्री हरि की आराधना करने से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं. ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति आती है और परिवार का माहौल हमेशा सुखद रहता है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार देवर्षि नारद मुनि एक गंधर्व थे जिनको उपबर्हणकहा जाता था. उन्हें अपनी खूबसूरती पर बहुत अभिमान था. एक बार वे कुछ अप्सराओं के साथ सज-धज कर ब्रह्मा जी के पास पहुंच गए और उन्ही के सामने विहार करने लगे. इसको देख ब्रह्मा जी नाराज हो गए और उन्होंने नारायण जी को शूद्र योनि में जन्म लेने का श्राप दिया.
पौराणिक कथाओं के अनुसार देवर्षि नारायण को न सिर्फ देवी-देवताओं द्वारा बल्कि दैत्यों के द्वारा भी पूजा जाता है. वे देवलोक से लेकर पृथ्वीलोक तक आसानी से आ जा सकते थे. माना जाता है कि, जो भी इनकी विधि-विधान से पूजा करता है उसको करियर में विशेष सफलता प्राप्त होती है.
देवर्षि नारद की जयंती के दिन व्रत रखना का भी विधान होता है. इस दिन नारद जी की पूजा के साथ-साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करना भी शुभ माना जाता है. इससे आप आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं.
धार्मिक मान्यता के अनुसार नारद जी की आराधना करने से व्यक्ति को बुद्धि, बल, विवेक आता है. आज की दिन विष्णु सहस्त्रनाम और श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करने से भी लाभ प्राप्त होता है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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