Kalashtami November 2023: कब है कार्तिक माह की कालाष्टमी? जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
काल भैरव देव की पूजा निशा काल में की जाती है। इस व्रत के पुण्य प्रताप से व्यक्ति को मृत्युलोक में सभी प्रकार का सुख प्राप्त होता है।
काल भैरव देव की पूजा निशा काल में की जाती है। इस व्रत के पुण्य प्रताप से व्यक्ति को मृत्युलोक में सभी प्रकार का सुख प्राप्त होता है।
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चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 04 अप्रैल को शाम 04.14 बजे शुरू होगी और अगले दिन 05 अप्रैल को दोपहर 01.28 बजे खत्म होगी।
मृत्यु के बाद व्यक्ति की आत्मा अपनी अंतिम यात्रा पर निकलती है, जिसमें उसे कई पड़ाव पार करने पड़ते हैं।
इस नक्षत्र के जातकों की संगीत और कला के प्रति भी बहुत रुचि होती है और सिखाने का काम भी बख़ूबी कर सकते हैं।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर परिवर्तिनी एकादशी व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान से विष्णु जी की पूजा की जाए, तो कष्टों से मुक्ति मिलती है।
तुलसी दिवस पर पूजा के दौरान विशेष मंत्रों का जाप करना चाहिए, ऐसा करने से कभी भी धन की कमी नहीं होती है।