बेहद ही शुभ योगों में मनाई जा रही है फुलेरा दूज, इसी दिन से हो जायेगा होली का आगाज़

फाल्गुन मास (Phalguna Month 2022) में एक महत्वपूर्ण त्योहार मनाया जाता है जिसका नाम है फुलेरा दूज। फुलेरा दूज (Phulera Dooj 2022) का यह पर्व भगवान श्री कृष्ण को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण और राधा रानी की पूजा करने से हर तरह के कष्ट और परेशानियों से छुटकारा पाने के साथ-साथ प्रेम जीवन में बनी किसी भी अड़चन से भी निपटा जा सकता है।

इस वर्ष फुलेरा दूज पर बेहद ही शुभ योग बन रहा है। क्या है यह शुभ योग? क्या है इस वर्ष फुलेरा दूज का शुभ मुहूर्त? फुलेरा दूज का महत्व क्या होता है? इस दिन किन उपायों को करके आप अपने प्रेम जीवन में आने वाली किसी भी तरह की तकलीफ और परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं। इन सभी बातों का जवाब जानने के लिए यह लेख अंत तक पढ़ें।

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फुलेरा दूज से हो जाती है होली खेलने की शुरुआत: क्यों और कैसे जानने के लिए पढ़ते रहें ये लेख।

फुलेरा दूज 2022 का शुभ मुहूर्त 

मांगलिक कार्य करने के लिए इस बार फुलेरा दूज का त्योहार बहुत ही खास है क्योंकि यह पूरा  दिन अबूझ मुहूर्त के चलते जातकों को शुभ फल देने वाला रहेगा। फुलेरा दूज के दिन का यह अबूझ मुहूर्त 3 मार्च की रात्रि 09 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 4 मार्च रात 08 बजकर 47 मिनट तक रहने वाला हैI वैदिक पंचांग के अनुसार फुलेरा दूज का त्योहार फाल्गुन माह शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को  मनाया जाता हैI

फुलेरा दूज पर बन रहा है बेहद ही शुभ संयोग

फुलेरा दूज का त्यौहार बेहद खूबसूरत होता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी को फूलों से सजाया जाता है और इनके साथ फूलों से ही होली खेली जाती है। इस वर्ष फुलेरा दूज का यह पर्व 4 मार्च यानी शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन बन रहे शुभ योगों की बात करें तो इस वर्ष फुलेरा दूज पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। यह दोनों ही योग ज्योतिष की दुनिया में बेहद ही शुभ माने गए हैं।

समय की बात करें तो, यह योग 4 मार्च को रात 1 बजकर 52 से अगले दिन सुबह 6 बजकर 42 मिनट  तक रहने वाले हैं। इसके बाद शुक्ल योग प्रारंभ हो जाएगा। अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों को करने के लिए बेहद ही उत्तम फलदाई माना जाता है। कहते हैं कोई भी मांगलिक कार्य या शुभ कार्य करना हो तो उन्हें इन योगों में बेहद ही आसानी से किया जा सकता है।

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फुलेरा दूज का महत्व

बेहद ही खूबसूरत पर्व फुलेरा दूज के बारे में ऐसे धार्मिक मान्यताएं हैं कि यदि इस दिन राधा कृष्ण की पूजा की जाए, उन्हें फूलों से सजाया जाए, उनके साथ फूलों वाली होली खेली जाए तो इससे व्यक्ति की तमाम मनोकामना शीघ्र और अवश्य ही पूरी होती है। इसके अलावा फुलेरा दूज के दिन यदि विवाह संपन्न किया जाएगा तो ऐसे जातकों पर राधे कृष्ण की कृपा आजीवन बनी रहती है। साथ ही उनका प्रेम हमेशा मजबूत होता है।

फुलेरा दूज से होता है होली का आगमन

दरअसल ब्रज क्षेत्र में फुलेरा दूज से होली का आगमन शुरू हो जाता है। कहते हैं इसी दिन भगवान श्री कृष्ण राधा रानी के साथ फूलों वाली होली खेलते हैं। मथुरा और वृंदावन में आज भी भगवान श्री कृष्ण को फुलेरा दूज के दिन होली के लिए तैयार कर दिया जाता है। होली के लिए कैसे तैयार किया जाता है? दरअसल इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की कमर पर छोटा सा रंगीन कपड़ा बाँध दिया जाता है जो इस बात का प्रतीक होते हैं कि अब श्रीकृष्ण होली खेलने के लिए तैयार हैं।

इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फुलेरा दूज को अबूझ मुहूर्त भी माना गया है। ऐसे में इस दिन आपको कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने के लिए कोई भी शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती है क्योंकि इस दिन का हर एक पल और घड़ी शुभ होते हैं।

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फुलेरा दूज मनाने की सही विधि 

इस दिन की शुरुआत भगवान कृष्ण और अपने ईष्ट देव को गुलाल चढ़ाकर की जाती है।तरह-तरह के पकवान बनाकर भगवान को इसका भोग लगाया जाता है।राधा कृष्ण की मूर्तियों को खूबसूरत ढंग से सजाया जाता है और उन्हें रंग लगाया जाता है।अबूझ मुहूर्त होने के चलते इस दिन वैवाहिक काम, शुभ काम की शुरुआत, नए काम का आगाज़, इत्यादि किया जा सकता है। 

फुलेरा दूज की पौराणिक कथा

फुलेरा दूज क्यों मनाते हैं इससे संबंधित एक पौराणिक कथा के अनुसार बताया जाता है कि, एक बार भगवान श्री कृष्ण राधा रानी से मिलने वृन्दावन बहुत दिनों से नहीं आए थे। ऐसे में राधा रानी दुखी हो गई। राधा रानी को दुखी देखकर गोपी उनकी गोपियाँ भी दुखी हो गई। राधा रानी के दुखी होने से मथुरा के सभी वन, पेड़, पौधे मुरझाने लगे। 

जब भगवान श्री कृष्ण को इस बारे में पता चला तो वह तुरंत राधा रानी से मिलने वृन्दावन आ गए। श्री कृष्ण के आगमन से राधा रानी और उनकी गोपियां इस तरह से प्रसन्न हुई कि चारों तरफ हरियाली छा गई। उस वक्त श्रीकृष्ण ने इन फूलों को तोड़कर राधा रानी के ऊपर फेंकना शुरू कर दिया। जवाब में राधा रानी ने भी ऐसा ही किया। इसके बाद गोपी और ग्वालों ने में भी ऐसा करना शुरू कर दिया। 

कहा जाता है यहीं से फुलेरा दूज के त्यौहार की शुरुआत हुई और हर साल मथुरा में इस दिन फूलों की होली खेलने की परंपरा शुरू हो गई।

विवाह में आ रही है अड़चन तो फुलेरा दूज के दिन अवश्य करें इनमें से कोई एक भी उपाय

फुलेरा दूज के दिन राधा कृष्ण मंदिर जायें और यहां पर पीली मिठाईयां, पीले रंग के फूल, पीले वस्त्र अर्पित करें। ऐसा करने से प्रेम विवाह की राह में आ रही अड़चनें दूर होती है और जल्द ही प्रेम योग बनने लगता है।इसके अलावा यदि आप किसी से प्रेम करते हैं और उनसे अपने दिल की बात नहीं कह पा रहे हैं तो फुलेरा दूज के दिन श्री कृष्ण मंदिर जाएं और एक भोजपत्र पर चंदन से अपने प्रेमी का नाम लिखकर इस भोजपत्र को राधा कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दें। कहा जाता है इस उपाय को करने से आपको आपका प्रेम अवश्य ही मिल जाएगा।यदि आपका विवाह टूटने की कगार पर है या फिर विवाहित जीवन में कोई परेशानी आ रही है या लाख जतन के बावजूद भी आपका विवाह नहीं हो पा रहा है तो फुलेरा दूज के दिन राधा कृष्ण की पूजा करें। मुमकिन हो तो इस दिन व्रत भी रखें। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होंगी।वैवाहिक जीवन में परेशानियां निरंतर बनी हुई है और आप उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं तो इस दिन अपनी सारी समस्या एक कागज पर लिखकर इसे राधा कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दें। आपके जीवन से तनाव और कष्ट दूर हो जाएगा।फुलेरा दूज के दिन राधा रानी को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें और इनमें से श्रृंगार की कोई भी एक चीज़ को अपने पास हमेशा के लिए संभाल कर रख लें। कहा जाता है इस उपाय को करने से शीघ्र विवाह के योग करने लगते हैं।

अधिक जानकारी: फुलेरा दूज का दिन भगवान कृष्ण और राधा रानी को समर्पित होता है दूसरा यह विवाह मुहूर्त का आखिरी दिन होता है, इन्हीं दोनों वजहों के चलते इस दिन रिकॉर्ड तोड़ शादियाँ संपन्न कराई जाती हैं। इसके अलावा नया घर खरीदने या वाहन खरीदने या गृह प्रवेश के लिए भी यह दिन विशेषतौर पर शुभ माना गया है।

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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