गणेश विसर्जन 2024- इन मंत्रों का जाप और विधि का कर लिया पालन तो सालों साल बनी रहेगी बाप्पा की कृपा!

गणेश उत्सव के भव्य त्यौहार का समापन होता है गणेश विसर्जन के साथ। इस दिन को अनंत चतुर्दशी भी पड़ती है। अगर आप गणेश उत्सव से संबंधित हमारा विस्तृत ब्लॉग पढ़ना चाहते हैं तो आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

बात करें गणेश विसर्जन की तो, गणेश उत्सव के दौरान जिस तरह से भव्य रूप से बाप्पा को घर लाया जाता है, उनका आदर सत्कार, पूजा की जाती है, उसी तरह से अनंत चतुर्दशी के दौरान ढोल नगाड़ों के साथ झांकियां निकालकर बाप्पा को स-सम्मान विधिपूर्वक पूजा आदि करके किसी भी पवित्र जलाशय या नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। माना जाता है कि गणेश चतुर्थी के दिन ही भगवान गणेश का जन्म हुआ था।

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2024 में कब है गणेश विसर्जन? 

जिस तरह से बाप्पा को घर में लाने का एक शुभ मुहूर्त होता है ठीक उसी तरह से विसर्जन का भी शुभ मुहूर्त होता है जिसका पालन करके अगर आप बाप्पा का विसर्जन करते हैं तो आपको अपने जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। बात करें वर्ष 2024 में गणपति बाप्पा विसर्जन के शुभ मुहूर्त की तो, 

इस दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 से दोपहर 12:40 तक रहेगा और विजय मुहूर्त दोपहर 2:18 से 3:07 तक रहेगा। 

इसके अलावा इस बात का विशेष ध्यान रखें की विसर्जन के समय अनंत चतुर्दशी रहती है और ऐसे में भगवान गणेश के साथ भगवान अनंत की पूजा इस दिन अवश्य करें।

गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 09:11 से 13:47

अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 15:19 से 16:51

सायाह्न मुहूर्त (लाभ) – 19:51 से 21:19

रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 22:47 से 27:12+

चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 16, 2024 को 15:10 बजे

चतुर्दशी तिथि समाप्त – सितम्बर 17, 2024 को 11:44 बजे

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गणेश विसर्जन का महत्व 

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और समृद्धि का देवता माना गया है। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले गणपति बाप्पा या भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन की सारे परेशानियां धीरे-धीरे करके दूर होने लगती है। इसके अलावा भगवान गणेश का संबंध बुध ग्रह से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में अगर आप भगवान गणपति की सच्चे दिल से पूजा करते हैं तो आपको उनकी पूजा से मिलने वाले शुभ परिणाम के साथ-साथ ग्रहों की शांति का भी शुभ परिणाम प्राप्त होता है। 

इसके अलावा गणेश भगवान की पूजा से कई तरह के वास्तु दोष भी जीवन से दूर होने लगते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद शुक्ल की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है इसलिए इसे विनायक चतुर्थी या कलंक चतुर्थी भी कहते हैं। इस दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को लोग घरों और पंडालों में स्थापित करते हैं, विधि विधान से बाप्पा की पूजा करते हैं। 10 दिनों तक चलने वाले इस भव्य उत्सव के आखिरी दिन गणेश भगवान की प्रतिमा को विसर्जित कर दिया जाता है। विसर्जन के दौरान लोग भगवान गणेश से अगले वर्ष जल्दी आने की कामना करते हैं।

क्यों किया जाता है गणपति विसर्जन? 

गणेश विसर्जन के सही कारण को ढूंढने जाए तो हिंदू धर्म ग्रंथो में इसका उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि महाभारत ग्रंथ को भगवान गणेश ने ही लिखा था। ऐसा कहा जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने गणेश जी को लगातार 10 दिनों तक महाभारत की कथा सुनाई और गणेश जी ने लगातार 10 दिनों तक इस कथा को लिखा। 10 दिनों बाद जब वेदव्यास जी ने गणेश जी को छुआ तो उनका शरीर तप रहा था। इसके बाद वेदव्यास जी ने उन्हें तुरंत ही पास के एक कुंड में ले जाकर उनके तापमान को शांत किया। ऐसा कहा जाता है कि गणेश विसर्जन करने से गणपति महाराज को शीतलता प्राप्त होती है।

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कैसे किया जाता है गणपति का विसर्जन? 

परंपरा के अनुसार कहा जाता है कि भगवान गणेश को ठीक उसी तरह से घर से विदा किया जाना चाहिए जैसे हम हमारे घर के सबसे प्रिय व्यक्ति को किसी पर यात्रा पर भेजने से पहले उनकी चीजों और उनकी जरूरत का ध्यान रखते हैं। ऐसे में बात करें गणपति बाप्पा की विदाई के दौरान किन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए तो, 

गणेश भगवान के विसर्जन से पहले उनकी विधिवत रूप से पूजा करें। पूजा में उन्हें मोदक और फल का भोग अवश्य लगाएँ।इसके बाद भगवान गणेश की आरती उतारें।उनसे विदा लेने की प्रार्थना करें। पूजा वाली जगह पर गणपति महाराज की प्रतिमा को सम्मान पूर्वक उठा लें। एक पटरे पर गुलाबी रंग का वस्त्र बिछा लें अब प्रतिमा को एक लकड़ी के पटरी पर धीरे से रख लें। लकड़ी के पटरी को पहले गंगाजल से साफ अवश्य करें। गणेश मूर्ति के साथ-साथ फल, फूल, वस्त्र और मोदक की पोटली जरूर रख दें।इसके अलावा एक पोटली में थोड़े से चावल, गेहूं और पांचों मेवे रखकर कुछ सिक्के भी इसमें डाल दें। अब इसे भी गणेश भगवान की प्रतिमा के पास रख दें। इसके बाद गणेश भगवान की मूर्ति को किसी बहते हुए जल में विसर्जित कर दें। विसर्जन करने से पहले उनकी आरती करें। आरती के बाद गणपति बाप्पा से मनोकामना पूरी करने का अनुरोध करें।

गणेश विसर्जन की पूजा के दौरान इन बातों का रखें विशेष ख्याल 

जब भी भगवान गणेश की पूजा करें कि तो उनकी पूजा में तुलसी का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं करना है। पूजा में भगवान गणपति की ऐसी ही प्रतिमा लाएं जिससे गणेश भगवान की सूंड बाईं दिशा की तरफ घूम रही हो। गणेश जी को मोदक और मूषक दोनों ही बहुत प्रिय हैं इसलिए ऐसी मूर्ति का चयन करें जिसमें यह दोनों चीज हों।

कब किया जा सकता है गणेश विसर्जन? 

गणेश विसर्जन को लेकर अलग-अलग लोगों के बीच अलग-अलग मान्यताएं होती हैं। हालांकि अगर परंपरा के अनुसार बात करें तो गणेश चतुर्थी के दिन भी गणेश विसर्जन किया जाता है। दरअसल इस दिन की पूजा करने के बाद भी बहुत से लोग विसर्जन कर देते हैं लेकिन चतुर्थी के दिन ही गणेश विसर्जन बेहद ही कम लोकप्रिय है। 

इसके अलावा डेढ़ दिन के बाद गणेश विसर्जन किया जा सकता है। बहुत से लोग या यूं कहें कि एक बड़ी आबादी गणेश विसर्जन डेढ़ दिन के बाद कर देती है। इस बात का ध्यान रखें की गणेश पूजा के बाद प्रतिमा को मध्याह्न के अगले पहर पर विसर्जित करें। 

इसके अलावा बहुत से लोग तीसरे दिन या फिर पांचवें दिन या फिर सातवें दिन विसर्जन करते हैं। हालांकि इसमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय तो अनंत चतुर्दशी का ही दिन है लेकिन फिर भी बहुत से लोग तीसरे दिन, पांचवें दिन और सातवें दिन भी गणेश विसर्जन करते हैं। ऐसे में आप भी चाहें तो इन दिनों का चयन गणेश विसर्जन के लिए कर सकते हैं। 

इसके बाद अंत में आता है अनंत चतुर्थी। दसवें दिन विसर्जन करना अर्थात अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। चतुर्दशी तिथि के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है जिससे चतुर्थी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा भगवान विष्णु के भक्त अनंत चतुर्दशी के दिन उपवास रखते हैं, भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और इस दौरान हाथों में धागा बांधते हैं जिसमें 14 अनंत गांठे होती हैं। कहा जाता है यह धागा भक्तों के हर संकट से जीतने की क्षमता देता है।

विसर्जन के दौरान इन दो मंत्रों का कर लिया जप तो सालों साल बनी रहेगी बाप्पा की कृपा

ॐ यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्। इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च॥

ॐ मोदाय नम:

गणेश विसर्जन के दौरान इन बातों का रखें विशेष ख्याल 

पूजा की हड़बड़ी या बाप्पा की विदाई अपने आप में भावुक पल होता है। ऐसे में कई बार लोगों से अनजाने में गलती हो जाती है। कहा जाता है कि इन गलतियों के चलते व्यक्ति को उनकी पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है। आपसे भी ऐसी चूंक या गलती ना हो जाए इसलिए हम आपको पहले से ही बता देते हैं कि गणेश विसर्जन के दौरान आपको किन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना है। अगर आपने इन बातों का पालन कर लिया तो आपके जीवन में गणपति बाप्पा की विशेष कृपा हमेशा बनी रहेगी।

गणेश जी की पूजा अर्चना अवश्य करें। बाप्पा की पूजा करना ना भूलें। इसके अलावा गणेश जी को फल, फूल और मोदक अर्पित करें। बहुत से लोग विसर्जन के दौरान एक पोटली बनाकर ये सभी वस्तुएं गणेश जी के साथ ही विसर्जित कर देते हैं। इसके अलावा जब आप घर से बाप्पा को विदा करें तो उनसे मंगल की कामना अवश्य करें। कहा जाता है कि बाप्पा अपने भक्तों की हर एक बात अवश्य सुना करते हैं। ऐसे में पूजा के दौरान अनजाने में भी हुई गलती की क्षमा मांगें और मंगल की कामना करें और उसके बाद बाप्पा की विदाई करें। घर से निकलते समय बाप्पा को पूरे घर में एक बार अवश्य घुमाएँ और घर की चौखट से निकलते वक्त बाप्पा का मुख घर की तरफ रखें और पीठ बाहर की तरफ। इसी तरह से उन्हें विसर्जन की जगह ले जाएँ। उनसे दोबारा अगले वर्ष जल्दी आने की कामना करें। 

अगर आप कहीं बाहर जाकर गणेश विसर्जन नहीं करते हैं अर्थात घर में ही गणपति बाप्पा का विसर्जन करते हैं तो आपको किन बातों का ध्यान रखना है:  इको फ्रेंडली गणपति बाप्पा की मूर्ति बनाएं, इसके बाद आप घर में ही किसी प्लास्टिक के टब या किसी बड़ी वस्तु में गणपति विसर्जन कर दें। विसर्जन करने के बाद उस पानी और मिट्टी को घर के ही किसी गमले या फिर गार्डन में डाल दें। इसके बाद बाप्पा से अगले वर्ष जल्दी आने की कामना करें और अपने जीवन से कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें।

गणेश विसर्जन का वैज्ञानिक कारण जानते हैं आप? 

बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि इस विसर्जन में भी विज्ञान छुपा हुआ है। दरअसल बाप्पा का विसर्जन हमें बहुत कुछ बताता है जैसे कि संसार में विसर्जन या यूं कहीं गणेश स्थापना और विसर्जन मानव को यह संकेत देता है कि इस दुनिया में कुछ भी अटल नहीं है। हर किसी को एक न एक दिन जल और जमीन में समाना ही होता है। इसके अलावा इससे पर्यावरण शुद्ध हो जाता है। गणेश विसर्जन के पीछे वैज्ञानिक कारण यह भी माना जाता है कि इससे पर्यावरण शुद्ध हो जाता है। इस मौसम में नदी, तालाब, पोखरे में जमा हुआ बारिश का पानी गणेश विसर्जन से शुद्ध होता है जिससे मछली, जोक जैसे अन्य दूसरे जीव जंतु किसी भी तरह की परेशानी नहीं उठाते हैं। 

इतना ही नहीं विसर्जन के लिए चिकनी मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को शुभ माना जाता है क्योंकि यह जल्दी पानी में घुल जाती है। हल्दी से बढ़ती है पानी की स्वच्छता। मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को चावल और फूलों के रंगों से रंगने के पीछे का कारण यह बताया जाता है कि इससे पानी दूषित नहीं होता है बल्कि साफ हो जाता है। इसके अलावा गणेश विसर्जन के समय पानी में कई सारी चीज नदी तालाब में प्रवाहित होती है जो बारिश के जल को आसानी से साफ कर देती हैं। 

विसर्जन के दौरान गणेश प्रतिमा के साथ हल्दी कुमकुम भी पानी में समाहित होता है। हल्दी एंटीबैक्टीरियल क्वालिटी रखती है। इसके साथ ही दूर्वा, चंदन, धूप, फूल भी पर्यावरण को स्वच्छ बनाते हैं। 

इस बात का रखें विशेष ख्याल 

आप जब भी बाजार से गणेश प्रतिमा लाने जाएं तो इस बात का विशेष ख्याल रखें कि आप मिट्टी से बनी इको फ्रेंडली प्रतिमा ही घर लेकर आयें। आजकल चंद पैसों की लालच में लोग पीओपी की प्रतिमाएं अर्थात प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी प्रतिमाएं भी बनाने लगे हैं जो दिखने में खूबसूरत तो लगती है लेकिन जब इन प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाता है तो यह पानी में घुलती नहीं है और पानी को साफ करने के बजाय उन्हें दूषित और जहरीला कर देती है जो पर्यावरण के लिए भी बहुत खतरनाक है। ऐसे में पीओपी प्रतिमाएं लाने से बचें और जितना हो सके आप घर पर ही इको फ्रेंडली गणपति को बनाकर इन्हें घर पर ही विसर्जित करें। इससे आपकी भक्ति के साथ-साथ पर्यावरण की स्वच्छता भी बनी रहेगी।

अनंत चतुर्दशी का व्रत 

बहुत से लोग अनंत चतुर्दशी का व्रत भी रखते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को अनंत पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। पूजा के बाद हाथ में रक्षा सूत्र बांधा जाता है जिसे अनंत कहते हैं। इसे पुरुष दाएं हाथ में बांधते हैं और स्त्रियां बाएं हाथ में पहनती हैं। 

इस अनंत सूत्र में 14 गाँठे होती हैं। अगर आप इस दिन का व्रत कर रहे हैं तो, 

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद कलश की स्थापना करें। कलश पर अष्टदल कमल के समान बने बर्तन में कुश से बने अनंत की स्थापना करें। इसके आगे कुमकुम, केसर और हल्दी के रंग से बनाया हुआ कच्ची डोर का 14 गांठों वाला अनंत रखें। इसके बाद इस मंत्र का जाप करें: ‘हे वासुदेव, इस अनंत संसार रूपी महासमुद्र में डूबे हुए लोगों की रक्षा करो और उन्हें अपने ध्यान करने में संलग्न करो। अनंत रूप वाले प्रभु तुम्हें नमस्कार है। इस मंत्र का उच्चारण करने के बाद अपने हाथ या फिर गले में इस धागे को बांध लें। अनंत की 14 गांठे 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

1: वर्ष 2014 में गणेश विसर्जन किस दिन किया जाएगा? 

गणेश विसर्जन 17 सितंबर 2024 को किया जाने वाला है। 

2: अनंत चतुर्दशी का क्या महत्व है? 

अनंत चतुर्दशी का व्रत करने से व्यक्ति को अनंत पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। 

3: भगवान गणेश को किसका देवता कहा जाता है?

भगवान गणेश को विद्या और बुद्धि का देवता माना गया है। साथ ही गणेश भगवान को सनातन धर्म में प्रथम पूजनीय का भी दर्जा दिया गया है।

 

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