मां कात्‍यायनी के लिए है चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन! नोट कर लें तिथि!  

जानें चैत्र नवरात्रि के छठे दिन की पूजन विधि!

चैत्र नवरात्रि का छठा दिन: नवरात्रि के इस दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस दिन देवी दुर्गा के छठे स्वरूप की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। माना जाता है कि कात्यायनी पूजन से जातक को सुख-समृद्धि, आयु और वैभव का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही, छठे दिन मां कात्यायनी का व्रत और पूजन अविवाहितों के लिए विशेष रूप से फलदायी होता है क्योंकि माता की कृपा से भक्त को मनचाहा वर प्राप्त होता है।

एस्‍ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में आपको चैत्र नवरात्रि के छठे दिन यानी कि षष्ठी तिथि के बारे में संपूर्ण जानकारी दी जाएगी। इस दिन देवी के किस स्वरूप की पूजा की जाती है? माता को प्रसाद के रूप में किस चीज़ का भोग लगाना चाहिए? किस मंत्र का जाप करना चाहिए और क्या है छठे नवरात्रि की पौराणिक कथा आदि के बारे में हम विस्तार से बात करेंगे। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और शुरुआत करते हैं चैत्र नवरात्रि के छठे दिन के बारे में।

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चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन: तिथि एवं शुभ मुहूर्त

इस बार 24 मार्च, 2026 को मंगलवार के दिन चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र है और प्रीति एवं आयुष्‍मान योग बन रहे हैं।

चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन: शुभ योग

जैसा कि हमने पहले बताया कि इस बार चैत्र नवरात्रि 2026 पर दो शुभ योग प्रीति और आयुष्‍मान योग बन रहे हैं। वैदिक ज्‍योतिष में इन दोनों योगों को बहुत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। छठे नवरात्रि पर ये दो शुभ योग बनने की वजह से इस दिन की शुभता और बढ़ जाती है।

प्रीति योग प्रेम और रिश्‍तों को मजबूत करता है जबकि आयुष्‍मान योग लंबी आयु और सम्‍मान का प्रतीक है। अक्‍सर शुभ अवसरों और त्‍योहारों पर ये योग एकसाथ बनते हैं।

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चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन: कैसा है मां कात्यायनी का स्वरूप?

देवी शक्ति ने महिषासुर राक्षस का वध करने के लिए देवी कात्यायनी का अवतार लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी के इस स्वरूप को काफी हिंसक माना जाता है और इस वजह से देवी कात्यायनी “युद्ध की देवी” के नाम से भी जानी जाती हैं।

इनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और भव्य है। देवी का वर्ण स्वर्ण की तरह चमकीला और उज्जवल है। कात्यायनी देवी की सवारी शेर है और इनकी चार भुजाएं हैं। यह अपने बाएं हाथों में कमल और तलवार धारण किए हुए हैं जबकि दाहिने हाथ वरद और अभय मुद्रा में हैं। देवी कात्यायनी ने लाल रंग के वस्त्र धारण किए हुए हैं जिसमें उनका स्वरूप अत्यंत सुंदर और मनोहर लगता है।

चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन: पौराणिक कथा

किवदंती है कि मां कात्यायनी ऋषि कात्यायन की तपस्या के फल स्वरूप उनके घर में उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुई थीं। अपने इसी स्वरूप में मां ने महिषासुर नामक असुर का वध किया था और इसी वजह से देवी का नाम मां कात्यायनी पड़ा।

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चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन: प्रिय भोग 

मां कात्‍यायनी का संबंध पीले रंग से भी जोड़कर देखा जाता है। मां को यदि शहद का भोग लगाया जाए तो इसे बेहद ही शुभ मानते हैं। ऐसे में आप इस दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना ना भूलें। शहद का भोग लगाने से उपासक के व्यक्तित्व में निखार आता है। हालांकि, अगर आप चाहें तो, देवी को प्रसाद के रूप में लौकी और मीठा पान भी अर्पित कर सकते हैं।

चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन: शुभ रंग  

जैसा कि हमने पहले भी बताया कि देवी कात्यायनी को पीला रंग पसंद है इसलिए इस दिन पीले रंग की वस्‍तुओं एवं वस्‍त्रों का प्रयोग करना चाहिए। नवरात्रि के छठे दिन पूजा में पीले रंग और ग्रे रंग के कपड़े पहन सकते हैं। देवी को पीले फूल या बेर के पेड़ का फूल अर्पित करें।

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चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन: पूजन विधि

आप निम्‍न विधि से मां कात्‍यायनी की पूजा कर सकते हैं:

  • छठे नवरात्रि पर प्रातःकाल स्नानादि से निवृत् होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। 
  • इसके बाद सच्चे मन से देवी का स्मरण करते हुए मां कात्यायनी की पूजा शुरू करें। 
  • पूजन में सबसे पहले देवी कात्यायनी का जल से अभिषेक करें और फिर लगातार मंत्रोच्चारण करते हुए देवी को लाल रंग के फूल, अक्षत्, लाल चुनरी, सिंदूर, धूप, फल, शहद और दीप आदि अर्पित करें।
  • अब माता कात्यायनी के बीज मंत्र का जाप करें और फिर कथा का पाठ करें। 
  • पूजा के आखिर में आरती करें और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।

चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन: मंत्र

मां कात्‍यायनी को प्रसन्‍न करने के लिए चैत्र नवरात्रि का छठा दिन आने पर निम्‍न मंत्र का जाप कर सकते हैं:

1.या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

2.चंद्र हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना|

कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि||

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चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन: अविवाहित कन्‍याओं के लिए उपाय

ऐसा माना जाता है कि गोपियों ने भगवान कृष्‍ण से विवाह करने की अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए देवी कात्‍यायनी की पूजा कर के उनका आशीर्वाद लिया था। नवरात्रि के छठे दिन अविवाहित स्‍त्रियां मनचाहा वर पाने के लिए इस दिन मां कात्‍यायनी की पूजा करते हैं। अगर किसी स्‍त्री के विवाह में कोई अड़चन आ रही है, तो आप चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्‍यायनी की पूजा करें।

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मां कात्‍यायनी की सवारी क्‍या है

शास्‍त्रों के अनुसार शेर मां कात्‍यायनी की सवारी है जिसे शक्‍ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। शेर पर सवार मां कात्‍यायनी अपने भक्‍तों को निडर और साहसी बनने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका स्‍वरूप दर्शाता है कि मां कात्‍यायनी बुराई का नाश करने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं।

मां कात्‍यायनी किसकी कुलदेवी हैं

मां कात्‍यायनी को यदुवंशियों की कुलदेवी माना जाता है। भगवान कृष्‍ण की पूजा करने वाले यदुवंशी मां कात्‍यायनी की उपासना किया करते थे।

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अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

1. चैत्र नवरात्रि के छठे दिन देवी के किस स्वरूप की पूजा की जाती है?

चैत्र नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर मां कात्यायनी की पूजा होती है।

2. कात्यायनी पूजा किसे करनी चाहिए?

जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है, उनके लिए कात्यायनी पूजा करना शुभ रहता है। 

3. साल 2025 में चैत्र नवरात्रि कितने दिन के होंगे?

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 9 दिन के होंगे।

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