मिथुन राशि में मंगल वक्री: कैसे करेगा आपके जीवन को प्रभावित

एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग के माध्यम से हम आपको मिथुन राशि में मंगल वक्री (30 अक्टूबर, 2022) से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान करेंगे जैसे कि गोचर की तिथि, समय और सभी जातकों पर इसका प्रभाव आदि। साथ ही, हम उन अचूक उपायों के बारे में भी चर्चा करेंगे जिन्हें अपनाकर आप कमज़ोर मंगल को मज़बूत कर सकते हैं। 

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यदि आप भी उत्सुक हैं ये जानने के लिए कि मिथुन राशि में मंगल के वक्री होने से किन राशियों की आर्थिक स्थिति में आएगा सुधार? किन राशियों का वैवाहिक जीवन होगा सुखी? क्या मिलेगी आपको मनचाही नौकरी और किन राशियों का व्यापार पकड़ेगा रफ़्तार? तो आपको इन सभी सवालों के सटीक जवाब मिलेंगे इस ब्लॉग में। जो कि हमारे विद्वान और अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा मंगल ग्रह की चाल, स्थिति और दशा की गणना कर तैयार किया गया है। तो, आइए जानते हैं कि मिथुन राशि में मंगल वक्री का सभी 12 राशियों पर किस प्रकार का प्रभाव देखने को मिलेगा।

क्या होता है वक्री ग्रह?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब कोई ग्रह वक्री अवस्था में होता है तो वह पीछे की ओर यानी कि उल्टी दिशा में चलता हुआ प्रतीत होता है। हालांकि वक्री अवस्था में ग्रह शुभ और अशुभ दोनों तरह के फल प्रदान करते हैं, लेकिन मंगल का वक्री होना लोगों के जीवन को अत्यधिक प्रभावित करता है क्योंकि मंगल को ऊर्जा का कारक ग्रह माना गया है। ऐसे में, जब मंगल वक्री होता है तो जातकों के लिए ये समझना बेहद मुश्किल होता है कि वे अपनी ऊर्जा को कहाँ इस्तेमाल करें। इसलिए इस अवधि में ज्यादातर जातक अपनी ऊर्जा का दुरुपयोग करते हुए देखे जा सकते हैं जिससे उनके जीवन में परेशानियां उत्पन्न होती है। 

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ज्योतिष में मंगल ग्रह का महत्व

वैदिक ज्योतिष में मंगल को बेहद महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है जो व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में अहम भूमिका निभाता है। मंगल को साहस, शक्ति, पराक्रम एवं भूमि का कारक माना गया है और इन्हें मेष और वृश्चिक राशि का स्वामित्व प्राप्त है। वहीं, अगर नक्षत्रों की बात करें तो, यह मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी हैं जो मकर राशि में उच्च के होते हैं और कर्क राशि में नीच के। मंगल ग्रह ही कुंडली में मांगलिक दोष या मंगल दोष के लिए जिम्मेदार है जिसकी वजह से जातक को विवाह से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

हालांकि, जिन लोगों की कुंडली में मंगल मज़बूत होता है, वो लोग दृढ़ संकल्पी होते हैं। ऐसे लोग मुश्किल से मुश्किल हालातों में भी सही फैसला लेने में सक्षम होते हैं। वही दूसरी तरफ, कुंडली में मंगल की कमज़ोर स्थिति के चलते जातक किसी भी तरह का निर्णय तुरंत नहीं ले पाता है। 

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मिथुन राशि में मंगल वक्री: तिथि और समय 

उग्र ग्रह और लाल ग्रह के नाम से प्रसिद्ध मंगल अब जल्दी ही वक्री होने जा रहा है। मिथुन राशि में 30 अक्टूबर 2022 को रविवार की शाम 6 बजकर 19 मिनट पर मंगल वक्री हो जाएंगे और 13 नवंबर 2022 तक ये इसी अवस्था में रहेंगे। 

कुंडली में मंगल को मज़बूत करने के उपाय 

मंगलवार को मंगल का दिन माना गया है इसलिए इस दिन व्रत करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। प्रतिदिन 27 बार “ॐ भौमाय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए।मंगलवार को भगवान नरसिंह के लिए तेल का दीपक जलाना चाहिए।यदि संभव हो तो, मंगलवार के दिन गरीबों और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।रोज़ाना 108 बार ‘ॐ भूमि पुत्राय नमः’ का जाप करने से मंगल मज़बूत होता है।

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मिथुन राशि में मंगल वक्री: राशि अनुसार राशिफल और उपाय

मेष

मेष राशि के लिए मंगल देव उनके प्रथम यानी लग्न भाव के स्वामी होने के साथ-साथ उनके अष्टम भाव के स्वामी भी होते हैं। अब मंगल देव इस दौरान अपनी वक्री अवस्था में आपकी राशि के…(विस्तार से पढ़ें)

वृषभ

वृषभ राशि के जातकों के लिए मंगल उनके खर्चों के द्वादश और दीर्घकालीन साझेदारियों के सप्तम भाव के स्वामी होते हैं। अब वे आपके दूसरे भाव में वक्री होंगे। कुंडली का दूसरा भाव परिवार…(विस्तार से पढ़ें)

मिथुन

मिथुन राशि के जातकों के लिए मंगल देव उनके एकादश भाव तथा छठे भाव के स्वामी होते हैं। अब 30 अक्टूबर 2022 को मंगल आपकी राशि से ही अपना वक्री करेंगे यानी मंगल का…(विस्तार से पढ़ें)

कर्क

कर्क राशि के जातकों के लिए मंगल योगकारक ग्रह होते हैं। क्योंकि यह आपके केंद्र और त्रिकोण भावों यानी पंचम और दशम भावों को नियंत्रित करते हैं। अब इस दौरान…(विस्तार से पढ़ें)

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सिंह

सिंह राशि के जातकों के लिए मंगल उनके नवम अर्थात भाग्य भाव व चतुर्थ भाव के स्वामी होने से योगकारक ग्रह बन जाते हैं। ऐसे में 30 अक्टूबर को योगकारक ग्रह का आपके लाभ…(विस्तार से पढ़ें)

कन्या

कन्या राशि के जातकों के लिए मंगल आपके भाई-बहनों के तृतीय भाव और अनिश्चितता व गोपनीयता के अष्टम भाव के स्वामी होते हैं। अब मंगल आपके कर्म यानी दशम भाव में अपना…(विस्तार से पढ़ें)

तुला

तुला राशि के जातकों के लिए मंगल आपके द्वितीय व सप्तम भाव पर शासन करते हैं और अब वे आपकी राशि से पिता, गुरु और भाग्य के नवम भाव में वक्री होंगे। इसके परिणामस्वरूप आपको…(विस्तार से पढ़ें)

वृश्चिक

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मंगल उनके लग्नेश होने के साथ-साथ उनके छठे भाव के स्वामी भी हैं। अब वे आपकी राशि से अष्टम भाव में वक्री होंगे। ऐसे में लग्नेश का अष्टम भाव में…(विस्तार से पढ़ें)

धनु

धनु राशि के जातकों के लिए मंगल उनके पंचम व द्वादश भाव के स्वामी हैं और अब वे आपके जीवनसाथी व व्यावसायिक साझेदारी के सप्तम भाव में वक्री होंगे। ऐसे में आपकी राशि में मंगल की…(विस्तार से पढ़ें)

मकर

मकर राशि के जातकों के लिए मंगल ग्रह आपके चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी होते हैं। अब इस दौरान मंगल आपकी राशि से छठे भाव में वक्री अवस्था में अपना गोचर करेंगे। कुंडली में…(विस्तार से पढ़ें)

कुंभ

मकर राशि के जातकों के लिए मंगल ग्रह आपके चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी होते हैं। अब इस दौरान मंगल आपकी राशि से छठे भाव में वक्री अवस्था में अपना गोचर करेंगे। कुंडली में…(विस्तार से पढ़ें)

मीन

मीन राशि के जातकों के लिए मंगल देव उनके द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होते हैं और अब वे आपकी माता, घर, घरेलू जीवन, भूमि, संपत्ति और वाहनों के चतुर्थ भाव में वक्री हो रहे हैं। इसके…(विस्तार से पढ़ें)

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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