Ashadha Amavasya 2022: पितृदोष को दूर करने के लिए इस दिन करें ये उपाय, होगा लाभ

हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल का चौथा महीना आषाढ़ ( Ashadha Month 2022 ) का कहलाता है, जिसकी शुरुआत बीती 15 जून को हुई और यह 13 जुलाई तक जारी रहेगा. जुलाई में गुरु पूर्णिमा के साथ इसका समापन होगा. इस माह में पड़ने वाली अमावस्या को आषाढ़ अमावस्या के नाम से जाना जाता है. भगवान विष्णु से संबंध रखने वाले इस माह में देवशयनी एकादशी और गुप्त नवरात्रि जैसे बड़े त्योहार भी आते हैं. मान्यता है कि माह की शुरुआत होते ही भगवान विष्णु ( Lord Vishnu ) चार महीने के लिए निद्रा में चले जाते हैं और वे फिर देवउठनी पर ही जागते हैं. माह में पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व है. आषाढ़ माह की अमावस्या 28 जून को पड़ रही है और हिंदू पंचांग के अनुसार इसका समय सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगा और ये 29 जून की सुबह 8 बजकर 21 मिनट तक जारी रहेगा.

आप आषाढ़ अमावस्या पर कुछ ज्योतिष उपाय करके पितृदोष आसानी से दूर कर सकते हैं. कई बार पितृ अगर नाराज हो जाए, तो तरक्की में बाधाएं, शारीरिक समस्या, घर में कलह और दरिद्रता भरा माहौल बना रहता है. लोगों को इसका अंदाजा ही नहीं होता कि उनकी की हुई गलतियों की वजह से उनके पितृ उनसे नाराज हैं. इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएंगे, जिन्हें आप आषाढ़ अमावस्या पर अपनाकर जीवन में सुख एवं समृद्धि ला सकते हैं. जानें इनके बारे में….

इस दिन करें ये उपाय

1. कहा जाता है कि आषाढ़ अमावस्या पर श्राद्ध कर्म करने से पितृदोष तो दूर होता है, साथ ही मोक्ष की प्राप्ति भी होती है. कुंडली में मौजूद पिृतदोष को दूर करने के लिए अमावस्या के दिन सुबह स्नान करें और ध्यान रहे कि इस दौरान आपको गंगाजल का इस्तेमाल करना है. इसके बाद पूजा-पाठ करें और पितरों को खीर एवं पूड़ी का भोग जरूर लगाएं.

2. कहते हैं कि आषाढ़ अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की पूजा करने से भी पितृदोष दूर होते हैं. इसके लिए पीपल के पेड़ की पूजा करने जाए और साथ में कलावा, दूध, पानी और मिश्री लेकर जाए. पहले पीपल के चारों और कलावा लपेटें और फिर सभी चीजों को चढ़ाए. मान्यता है कि ऐसा करने से सिर्फ पितृ ही नहीं कुंडली से सभी प्रकार के दोष दूर हो सकते हैं.

3. अगर आपको लगता है कि आपकी कुंडली में पितृदोष है, तो ऐसे में आप पीपल के पेड़ से जुड़ा एक और उपाय कर सकते हैं. इसके लिए आपको पीपल का पेड़ उगाना है. कहीं एक पीपल के पेड़ को उगाएं और उसकी नियमित रूप से देखरेख करें. शास्त्रों में कहा गया है कि आपका ये तरीका पितरों को प्रसन्न कर सकता है.

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