Astro Tips: शनिवार के दिन पानी में दूध और गुड़ मिलाकर पीपल के पेड़ को करें अर्पित, दूर होंगे शनि संबंधी दोष

पीपल का पेड़ हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है. इसे देव वृक्ष कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि पीपल के पेड़ में देवताओं का वास होता है. शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है. इसलिए सौभाग्य और सुख की प्राप्ति के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए. पीपल की पूजा (Peepal tree ) करने से आपके ग्रह शांत होते हैं और जो लोग पीपल की पूजा करते हैं उन्हें हमेशा सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने शनि दोष दूर होते हैं. शनि की ढैय्या और साढ़े साती से जूझ रहे लोगों को शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने की सलाह दी जाती है. ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. ऐसा माना जाता है कि शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं. आइए जानें आप शनिवार के दिन किस विधि से शनि देव की पूजा कर सकते हैं.

इस विधि से करें पूजा

शनिवार के दिन सुबह पेड़ में जल अर्पित करने से मन को शांति मिलती है. इस दिन पीपल को जल अर्पित करने से कुंडली के कमजोर ग्रह मजबूत होते हैं.

जल चढ़ाने के साथ पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें. ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है. पीपल के पेड़ की परिक्रमा करने से कुंडली में व्याप्त कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है.

शनिवार के दिन पीपल को दोनों हाथों से स्पर्श करके सात परिक्रमा करें. ऐसा करते समय “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें. इससे शनि की ढैय्या और साढ़े साती का बुरा प्रभाव कम होता है.

शनि की ढैय्या और साढ़े साती के बुरे प्रभाव से पीड़ित लोगों को हर शनिवार को पीपल के पेड़ पर जल में गुड़ और दूध मिलाकर अर्पित करना चाहिए. साथ ही शनिवार की शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

पीपल के 11 पत्ते लेकर उन पर चंदन से जय श्री राम लिखें. इन पत्तों की माला बनाकर हनुमान जी को अर्पित करें. इससे शनि दोष दूर होंगे और शुभ फल प्राप्त होंगे.

अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार हैं और ठीक नहीं हो पा रहा है तो पीपल की जड़ को उसके तकिये के नीचे रखें. इससे जल्द ही स्वास्थ्य अच्छा होगा.

जिस व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष होता है, अगर वह पीपल का पेड़ लगाता है तो पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.

सूर्योदय से पहले पीपल की पूजा नहीं करनी चाहिए और रविवार के दिन पीपल को जल नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही इसकी पूजा करनी चाहिए.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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