Baglamukhi Jayanti 2023: मां बगलामुखी की पूजा का महाउपाय, जिसे करते ही बनने लगते हैं बिगड़े काम

शक्ति की साधना में मां बगलामुखी की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. हिंदू धर्म में इन्हें तंत्र की देवी के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि मां बगलामुखी की विधि-विधान से पूजा करने पर साधक की बड़ी से बड़ी मनोकामना जल्द ही पूरी होती है और उसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विजय मिलती है. मां बगलामुखी की जयंती इस साल 29 अप्रैल 2023 को मनाई जाएगी. माता बगलामुखी की साधना-आराधना के लिए यह दिन बेहद शुभ और फलदायी माना गया है. आइए मां बगलामुखी माता की पूजा से जुड़े उन उपायों के बारे में जानते हैं, जिसे करते ही सुख-समृद्धि वरदान मिलता है.

यदि आप चाहते हैं कि आपकी बगलामुखी साधना शीघ्र ही सफल और शुभ साबित हो तो आपको देवी की पूजा के करते समय हमेशा पीले रंग कपड़े पहनकर बैठने के लिए पीले रंग का ऊनी आसन इस्तेमाल करना चाहिए.
माता बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में मां बगलामुखी की पूजा में न सिर्फ पीले पुष्प और हल्दी की गांठ विशेष रूप से चढ़ाना चाहिए बल्कि उनके मंत्र का जप करने के लिए हल्दी की ही माला का प्रयोग करना चाहिए.
मां बगलामुखी का आशीर्वाद पाने के लिए बगलामुखी जयंती वाले दिन किसी योग्य पंडित के जरिए बगलामुखी यंत्र को विधि-विधान से स्थापित कराना चाहिए और उसके बाद प्रतिदिन उसकी पूजा करनी चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार जिस स्थान पर मां बगलामुखी यंत्र की पूजा होती है, वहां पर भूलकर भी नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश नहीं हो पाता है. देवी की कृपा से वहां पर हमेशा सुख-सौभाग्य कायम रहता है.
बगलामुखी जयंती के दिन माता से मनचाहा आशीर्वाद पाने के लिए उनके किसी भी पावन धाम पर जाकर उनका दर्शन और पूजन करना चाहिए. मां बगलामुखी के प्रसिद्ध मंदिरों में मध्य प्रदेश के दतिया स्थित मां पीतांबरा का मंदिर, खरगोन का नवग्रह मंदिर, छत्तीसगढ़ में मां बमलेश्वरी माता का मंदिर, कांगड़ा में वनखंडी मंदिर, आदि हैं.
बगलामुखी जयंती पर माता बगुलामुखी से मनचाहा वरदान पाने के लिए पूरी श्रद्धा एवं विश्वास के साथ बगलामुखी कवच का पाठ करना चाहिए. माता की साधना का शीघ्र ही शुभ फल पाने के लिए उनकी पूजा हमेशा सुबह या फिर शाम या फिर आधी रात के समय करनी चाहिए.

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(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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