Baisakhi 2023: कब और क्यों मनाई जाती है बैसाखी, जानें सभी बातें सिर्फ एक क्लिक में

बैसाखी को किसानों को प्रमुख पर्व माना जाता है. पंचांग के अनुसार मेष संक्रांति के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व इस साल 14 अक्टूबर को पड़ेगा. यह पर्व मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. फसल कटाई की खुशी में मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर किसानों का उत्साह और उमंग देखते ही बनता है क्योंकि इसी दिन से वह अपनी नई फसल की तैयारी भी शुरु करता है. बैसाखी के दिन पंजाब में जहां किसान अपनी नई फसल को लेकर खुशियां मनाते हैं तो वहीं इसी दिन से सिखी नववर्ष की शुरुआत भी बड़े धूम-धाम तरीके से होती है. आइए बैसाखी पर्व के धार्मिक महत्व को और विस्तार से समझते हैं.

किसानों के लिए क्यों खास है बैसाखी

पंजाब और हरियाणा में बैसाखी को किसानों का महापर्व माना जाता है. यही कारण है कि इस दिन यहां के किसान अपनी फसल को काटने के बाद इकट्ठा किए गये अनाज की विशेष पूजा करते हैं. यह पर्व प्रकृति और परमात्मा के प्रति आभार करने के साथ आने वाले साल की मंगलकामना से जुड़ा हुआ है. बैसाखी का पर्व किसानों की खुशहाली और सुख-समृद्धि से जुड़ा हुआ है.

सिख परंपरा में बैसाखी का है बहुत महत्व

बैसाखी पर्व का संबंध सिखों के नए साल से भी जुड़ा है. सिखी मान्यता के अनुसार बैशाखी से नए साल की शुरुआत होती है. यही कारण है कि इस दिन पंजाब में लोग अपने घर-परिवार और मित्रों के साथ मिलकर इस पर्व को धूम-धाम से मनाते हैं. मान्यता यह भी है कि बैसाखी के दिन ही सिखों के दसवें गुरु यानि गुरु गोविन्द सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. यही कारण है कि बैसाखी के दिन पंजाब समेत देश भर के तमाम गुरुद्वारे में विशेष रूप से धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

कैसे मनाया जाता है बैसाखी का महापर्व

सिखी परंपरा के अनुसार बैसाखी के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद गुरुद्वारे जाते हैं और गुरुग्रंथ साहिब के सामने मत्था टेककर गुरुवाणी, शबद, कीर्तन सुनते हैं. इस दिन गुरु कृपा पाने के लिए विशेष रूप से गुरुद्वारे आदि में लंगर लगाकर लोगों को प्रसाद बांटा जाता है.

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(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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