Baisakhi 2023: बैसाखी के दिन आखिर क्यों करनी चाहिए सूर्य की पूजा, जानें धार्मिक महत्व एवं उपाय
बैसाखी का त्योहार सुख-समृद्धि का त्योहार माना जाता है. सिख समुदाय के लोगों के लिए यह नव वर्ष की शुरुआत होती है. वैशाख के महीने तक फसलें पक कर तैयार हो जाती है, साथ ही उनकी कटाई भी शुरू कर दी जाती है. माना जाता है कि इस दिन सूर्य का प्रभाव अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा होता है. इसलिए बैसाखी पर सूर्य पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार बैसाखी वाले दिन सूर्यदेव की साधना करने पर साधक को सुख-सौभाग्य के साथ आरोग्य की प्राप्ति होती है.
ज्योतिष के अनुसार बैसाखी पर सूर्य देवता मेष राशि में प्रवेश करते हैं जिसके बाद सौर वर्ष शुरू हो जाता है. ज्योतिष के अनुसार इस दिन सूर्यदेव से जुड़ी पूजा के कुछ उपाय करते ही जातक की कुंडली में सूर्य संबंधी शुभ फल प्राप्त होने लगते हैं. भगवान भास्कर की कृपा से उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है. आइए जानें बैसाखी पर सूर्य देव की पूजा का महत्व और महाउपाय जानते हैं.
बैसाखी का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि बैसाखी पर्व के दिन ही सिखों के दसवें गुरु माने जाने वाले गुरु गोविन्द सिंह ने खालसा पंथ की शुरुआत की थी. इस विशेष दिन सिख धर्म से जुड़े लोग गुरुद्वारे जाते हैं और गुरु ग्रंथ साहिब के सामने मत्था टेकते हैं. इस विशेष दिन से ही फसलों की कटाई भी शुरु होती है. माना जाता है कि जो भी व्यक्ति अपनी नई फसल से कुछ अनाज दान करता हैं उनका धन का भंडार हमेशा भरा रहता है. सूर्य साधना के लिए इस दिन अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है.
बैसाखी से जुड़े उपाय
इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं साथ ही आप निरोगी रहते हैं.
बैसाखी के दिन किसी नदी तीर्थ पर जाकर स्नान और दान करने का बहुत पुण्य फल माना गया है. ऐसे में यदि संभव हो तो इस पर्व पर गंगा स्नान करके नई फसल से पैदा हुए अनाज को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए.
धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि आप जीवन में सुख-सौभाग्य पाना चाहते हैं तो बैसाखी के दिन आटे का दिया बनाकर उसको जलाएं. ऐसा करने से आपको शुभ फल प्राप्त होते हैं.
बैसाखी के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देना बहुत लाभकारी माना जाता है. इसलिए कोशिश करें कि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर सूर्य को अर्घ्य दें.
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(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)
