Yearly Horoscope: 2023 में इन 3 राशि के लोगों पर राहु रहेंगे सबसे ज्यादा मेहरबान
राहु और शनि ग्रह को अशुभ ग्रह माना जाता है और इनके अशुभ प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में हर तरह की परेशानियां आने लगती है. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता है.
राहु और शनि ग्रह को अशुभ ग्रह माना जाता है और इनके अशुभ प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में हर तरह की परेशानियां आने लगती है. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता है.
केतु की महादशा चलने पर व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां और अशुभ परिणाम मिलते हैं. लेकिन अगर किसी जातक की कुंडली में केतु शुभ स्थान पर विराजमान हैं तो जातक को शुभ परिणाम दिलाते हैं.
14 दिसंबर का राशिफल: सुनिए क्या कहती है आपकी राशि
नया साल 2023 आने में कुछ ही समय बचा है। बीते साल से कई अच्छी और बुरी यादों को लेकर अब हम नए वर्ष में प्रवेश करेंगे। ऐसे में हर कोई नई उम्मीद और उत्सुकता से अपने सपनों को साकार करने का प्रयास करेगा। वह सब करने की सोचेगा जो बीते साल में नहीं कर…
शुक्र ग्रह को रोमांस, व्यापार के कारक के रूप में जाना जाता है। जब यह ग्रह राशि परिवर्तन या वक्री होता है तो इसका प्रभाव सभी राशियों पर विशेष रूप से पड़ता है। यह किसी के लिए शुभ तो किसी के लिए अशुभ हो सकता है।
Shani Transit 2023: शनि अगले साल 17 जनवरी 2023 को कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। कुंभ शनिदेव की मूल त्रिकोण राशि है। यहां बननेवाले विपरीत राजयोग से जातकों की किस्मत का सितारा बुलंद होगा और उन्हें हर क्षेत्र में कामयाबी मिलेगी।
Tulsi Plant Tips: जिनके घरों में तुलसी का पौधा रखा होता है उन्हें कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की जरुरत होती है, नहीं तो इसके विपरीत परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। तुलसी के गमले में शिवलिंग नहीं रखना चाहिए, ऐसा करने से तुलसी रूष्ट जाती है।
Dream Astrology: ऐसा माना जाता है कि जब कभी किसी भी प्रकार का बुरा स्वप्न देखा जाए, तो हनुमानजी को याद करें। वह स्वप्नों के माध्यम से होने वाली हानि को आप पर होने वाले हर प्रकार के बुरे प्रभावों को नष्ट करने में सक्षम हैं।
किसी भी शुभ अवसर पर घर के मुख्य द्वार पर अशोक या आम के पत्तों से बनी माला अवश्य लटकाई जाती है। ऐसा करने के पीछे कई ज्योतिषीय कारण बताए जाते हैं। इसके पत्ते पूजा के कलश में भी रखे जाते हैं।
Dream Astrology: रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में भी शुभ-अशुभ सपनों पर चर्चा की गई है। रावण ने भी अपनी हार को स्वप्न में ही देख लिया था वहीं महाभारत में गांधारी ने स्वयं अपने कुल का विनाश होते देखा था।