Buddha Purnima 2022 : भगवान बुद्ध की कही ये बातें दूर करती हैं हर संशय, इनसे मिलता है हर उलझन का वाजिब जवाब

भगवान गौतम बुद्ध (Lord Gautam Buddha) का जन्म एक राजसी परिवार में वैशाख मास की पूर्णिमा (Vaishakha Purnima) के दिन हुआ था, उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था. उनके जन्म के समय ही एक ज्योतिषी ने ये भविष्यवाणी की थी कि ये बालक बड़े होकर एक बड़ा धर्म गुरु बनेगा. ये भविष्यवाणी सत्य साबित हुई और 27 साल की उम्र में ही राजकुमार सिद्धार्थ ने राजसी सुखों को त्याग दिया और सन्यासी बन गए. 35 साल की उम्र में उन्हें बिहार के बोधगया में बरगद के वृक्ष के नी​चे बुद्धत्व की प्राप्ति हुई और तब वे सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बने. कहा जाता है कि बुद्धत्व की प्राप्ति भी उन्हें वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन ही हुई थी. इसीलिए हर साल इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध जयंती के तौर पर मनाया जाता है. बुद्ध ने ही बौद्ध धर्म (Buddhism) की नींव रखी थी. गौतम बुद्ध को नारायण का नौवां अवतार माना जाता है. आज दुनियाभर में उनके अनुयायी हैं. 16 मई को बुद्ध जयंती है. इस अवसर पर जानते हैं भगवान बुद्ध की कही वो बातें जो आपके मन के हर संशय को दूर कर सकती हैं.

भगवान बुद्ध के अनमोल वचन

जीवन में किसी उद्देश्य या लक्ष्य तक पहुंचने से ज्यादा महत्वपूर्ण उस यात्रा को अच्छे से संपन्न करना होता है.

जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से बेहतर स्वयं पर विजय प्राप्त करना है. अगर यह कर लिया तो फिर जीत हमेशा तुम्हारी होगी, इसे तुमसे कोई नहीं छीन सकता.

एक जलते हुए दीपक से हजारों दीपक जलाए जा सकते हैं जिसकी कोई सीमा नहीं है. फिर भी उस दीपक की रौशनी कम नहीं होती है. ठीक उसी तरह खुशियां बांटने से खुशियां कम नहीं होती है, बल्कि और भी बढ़ जाती हैं.

जीवन में आप चाहें जितनी अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ लो, कितने भी अच्छे शब्द सुनो, लेकिन जब तक आप उनको अपने जीवन में नहीं अपनाते तब तक उसका कोई फायदा नहीं होगा.

अज्ञानी होना बैल होने के बराबर है, जो सिर्फ आकार में बड़े होते हैं, लेकिन उनके दिमाग में कोई वृद्धि नहीं होती है.

बुराई से बुराई कभी खत्म नहीं होती. घृणा को तो केवल प्रेम द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है, ये एक अटूट सत्य है.

अपना रास्ता हमें खुद से बनाना होता है, क्योंकि हम इस दुनिया में हम अकेले आए हैं और अकेले ही जाना पड़ेगा. ऐसे में हमें हमारी किस्मत भी खुद ही बनानी है.

हमेशा क्रोधित रहने की आदत, ठीक उसी तरह है जैसे जलते हुए कोयले को किसी दूसरे व्यक्ति पर फेंकने की इच्छा से खुद पकड़ कर रखना. ये क्रोध सबसे पहले आपको ही जलाता है.

यदि हम अपनी समस्या का हल निकाल सकते हैं तो फिर चिंता करने की क्या जरूरत, और यदि समस्या का कोई हल नहीं तो फिर उसकी चिंता करने से कोई फायदा ही नहीं.

सिर्फ इंसान को ही नहीं, बल्कि हर प्राणी को सजा से डर लगता है. सभी मौत से डरते हैं. सभी जीवों को अपने समान समझिए और किसी भी जीव की हत्या न कीजिए. दूसरों को भी ऐसा करने से रोकिए.

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