Chaitra Month 2023: चैत्र माह को हिंदू धर्म क्यों माना जाता है खास, जानिए 10 कारण

Chaitra Month 2023: चैत्र का महीना शुरू हो चुका है. हिंदू कैलेंडर का पहला महीना चैत्र होता है जबकि अंतिम माह फाल्गुन होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो जाती है. इसी के साथ नया विक्रम संवत 2080 भी शुरू हो जाएगा. चैत्र माह को मधुमास के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू कैलेंडर के हर एक महीने का नाम नक्षत्रों के नाम पर होता है. चित्रा नक्षत्र की पूर्णिमा के कारण इस महीने को चैत्र का महीना कहा जाता है.

हिंदू नववर्ष का पहला महीना बहुत ही खास माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा जी ने इसी माह के शुक्ल प्रतिपदा तिथि से सृष्टि की रचना करने की शुरुआत की थी. आइए जानते हैं चैत्र महीने का 10 खास बातें.

21 मार्च को चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है और यह दिन विक्रम संवत 2029 खत्म हो जाएगा और फिर अगले दिन यानी 22 मार्च से नया विक्रम संवत 2080 की शुरुआत हो जाएगी.
नया हिंदू कैलेंडर विक्रम संवत की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है और इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है जिसमें लगातार 9 दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा-उपासना की जाती है. इसके अलावा इसी चैत्र माह की इसी शुक्ल प्रदिपदा तिथि पर ही भगवान राम का राज्याभिषेक, युधिष्ठिर का राज्याभिषेष और सिख धर्म के दूसरे गुरु अंगद देव का जन्म हुआ था.
चैत्र माह को कई जगहों पर साल की शुरुआत का पहला महीना माना जाता है. इसे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है. ईरान में इस तिथि को नौरोज यानी नया वर्ष के रूप में मनाया जाता है. आंध्र प्रदेश में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को उगादि नाम के पर्व के रूप में बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. अगादिका का मतलब होता है युग का प्रारंभ. यानी ब्रह्मा जी के द्वारा सृष्टि रचना का पहला दिन.
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को पंजाब में बैसाखी, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, सिंध में चेतीचंड, केरल में विशु, असम में बिहू और जम्मू कश्मीर में नवरेह के रूप में नए वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है.
बहुत पहले से ही दुनिया भर में मार्च के महीने को साल का पहला महीना ही माना जाता था. क्योंकि आज भी नए बही खाते की शुरुआत मार्च के महीने के बाद से शुरुआत होती है. ज्योतिष शास्त्र में ग्रह, ऋतु, माह, तिथि और पक्ष की गणना चैत्र प्रतिपदा तिथि ही होती है.
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर ही भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था. मान्यता है कि भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर सृष्टि के सभी प्राणियों को जल प्रलय से रक्षा की थी.
चैत्र महीने से मौसम में बदलाव आना शुरू हो जाता है. इस माह में बसंत ऋतु अपने चरम पर होती है. इसी के साथ शीत ऋतु खत्म हो जाती है और ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत हो जाती है. चैत्र माह से खानपान और जीवनशैली में बदलाव आता है. पानी ज्यादा पीना होता है और आसानी से पचने वाली चीजों को खाया-पिया जाता है.
चैत्र महीने में नीम के पत्ते का सेवन करने का विशेष महत्व होता है. नीम के पत्ते खाने से शरीर में बहने वाला रक्त शुद्ध होता है और कई तरह की बीमारियों से व्यक्ति का बचाव होता है. चैत्र के महीने में गौ दान करने विशेष फलदायी होता है. चैत्र माह देवी-देवताओं की प्रतिष्ठा के लिए बहुत शुभ माना जाता है. इसके अलावा चैत्र महीने में गुड़ का सेवन नहीं करना चाहिए.
चैत्र के महीने में शीतला सप्तमी, चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, नया विक्रम संवत् , एकादशी, रामनवमी जैसे बड़े और प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं.
चैत्र माह में मां दुर्गा और भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना करने का विधान होता है. इस महीने सूर्य देव को अर्घ्य देना, पीपल, केले, नीम,बरगद और तुलसी के पौधों को पानी देना और नियमित पूजा करना शुभ माना जाता है.

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