Chaitra Navratri 2022 : इस शक्तिपीठ में राधारानी ने श्रीकृष्ण को पाने के लिए की थी पूजा, जानें इस मंदिर की मान्यता

दुनियाभर में मातारानी के 51 शक्तिपीठ (Shaktipeeth) हैं. कहा जाता है कि जब महादेव पत्नी वियोग में देवी सती का पार्थिव शरीर लेकर ब्रह्मांड में घूम रहे थे, तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगा. इस संतुलन को पुन: स्थापित करने के लिए विष्णु ने सुदर्शन से देवी सती (Devi Sati) के पार्थिव शरीर के 51 टुकड़े कर दिए थे. ये टुकड़े जिन ​स्थानों पर गिरे थे, वहां एक शक्तिपीठ की स्थापना हुई. माता के 51 शक्तिपीठों में से एक मथुरा के वृंदावन में भी है. इस शक्तिपीठ को कात्यायनी शक्तिपीठ (Katyayani Shaktipeeth) कहा जाता है. मान्यता है कि यहां मातारानी के केश गिरे थे. दूर दूर से भक्त यहां आकर मातारानी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. चैत्र नवरात्रि के मौके पर जानिए कात्यायनी शक्तिपीठ से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में.

कृष्ण को पाने के लिए राधारानी ने की थी पूजा

श्रीमद् भागवत के दशम स्कंध के 22वें अध्याय में उल्लेख मिलता है कि इस शक्तिपीठ में राधारानी ने अपनी गोपियों के साथ श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए पूजा की थी. लेकिन श्रीकृष्ण और राधारानी को श्रीदामा का श्राप था, इसलिए उनका विवाह होना संभव नहीं था. वहीं श्रीकृष्ण गोपियों और राधारानी सभी को पति के रूप में मिल सकें, ये भी संभव नहीं हो सकता था. मातारानी के आशीर्वाद को साक्षात करने के लिए श्रीकृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ महारास किया था. तब से लेकर आज तक यहां पर कुंवारी लड़कियां और कुंवारे लड़के आकर इच्छित जीवनसाथी को प्राप्त करने की मन्नत मांगते हैं. कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से जो भी व्यक्ति आता है, वो कभी खाली हाथ नहीं जाता.

कंस वध से पहले श्रीकृष्ण ने किए थे मां के दर्शन

ये भी कहा जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण कंस के वध के लिए वृंदावन से मथुरा जा रहे थे, तब उन्होंंने मंदिर में जाकर माता के दर्शन किए थे और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था. उस समय यहां बालू से बनी मां की प्रतिमा हुआ करती थी. बाद में इस स्थान पर भव्य मंदिर बनवाया गया. इस मंदिर की स्थापना स्वामी केशवानंद महाराज ने 1 फरवरी 1923 को माघ पूर्णिमा के दिन बनारस और बंगाल के विख्यात वैदिक याज्ञिक ब्राह्मणों द्वारा वैष्णव परम्परा से कराई.

नवरात्रि पर जुटती है भारी भीड़

नवरात्रि के मौके पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है. इस अवसर पर यहां काफी भीड़ जुटती है. दूर दूर से श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेने आते हैं. कात्यायनी माता की मूर्ति के अलावा इस मंदिर में पंचानन शिव, विष्णु, सूर्य और सिद्धिदाता श्री गणेश की मूर्तियां भी हैं. इसके अलावा गुरु मंदिर, शंकराचार्य मंदिर, शिव मंदिर और सरस्वती मंदिर भी कात्यायनी मंदिर के पास ही हैं.

कात्यायनी शक्तिपीठ कैसे पहुंचें

कात्यायानी शक्तिपीठ के लिए आपको वृंदावन जाना होगा. अगर रेल मार्ग से आ रहे हैं, तो मथुरा में उतरकर टैक्सी या टैम्पो से वृंदावन पहुंच सकते हैं. गाड़ी भक्तजनों को मंदिर से करीब 200 मीटर पहले उतारती है. हवाई यात्रा करने वाले लोगों को पहले दिल्ली पहुंचना होगा. दिल्ली से टैक्सी लेकर वे सीधे वृंदावन आ सकते हैं.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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