Chaitra Navratri 2022 : राशि के अनुसार मां दुर्गा को करें इस रंग के फूल अर्पित, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 2 अप्रैल से हो गई है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा की जाती है. इस दौरान मां दुर्गा के भक्त उपवास रखते हैं और श्रद्धाभाव (Chaitra Navratri 2022) से पूजा करते हैं. मां दुर्गा को फल और फूल अर्पित किए जाते हैं. नवरात्रि की पूजा को फूलों के बिना अधूरा माना जाता है. इस दौरान राशि के अनुसार मां दुर्गा को फूल अर्पित करने से आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसा करने से मां दुर्गा (Chaitra Navratri) प्रसन्न होती हैं और आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं. राशि के अनुसार आपको कौन से रंग के फूल (Navratri) मां दुर्गा को अर्पित करने चाहिए आइए जानें.

मेष

मेष राशि का स्वामी मंगल माना जाता है. ऐसे में मेष राशि वाले जातक मां दुर्गा को लाल रंग के फूल अर्पित करें.

वृषभ

वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है. शुक्र को सफेद रंग बहुत ही प्रिय है. ऐसे में आप मां दुर्गा को सफेद रंग के फूल अर्पित करें.

मिथुन

इस राशि के स्वामी बुध ग्रह है. बुध का संबंध पीले रंग को माना जाता है. मिथुन के राशि लोग मां दुर्गा को पीले रंग के फूल अर्पित करें.

कर्क

इस राशि के जातक देवी दुर्गा को कमल और चमेली के फूल अर्पित करें.

सिंह

इस राशि के स्वामी सूर्य देव माने जाते हैं. इस राशि के जातक देवी मां को लाल या नारंगी रंग के फूल अर्पित करें.

कन्या

इस राशि के स्वामी बुध माने जाते हैं. इस राशि के जातक देवी मां को हरे रंग के फूल अर्पित करें.

तुला

इस राशि के स्वामी शुक्र हैं. इसलिए इस राशि के जातक देवी मां को सफेद रंग के फूल अर्पित करें.

वृश्चिक

इस राशि के जातकों को मां दुर्गा को लाल रंग के फूल अर्पित करने चाहिए.

धनु

इस राशि के स्वामी बृहस्पति हैं. गुरु को पीला रंग बहुत प्रिय है. इस राशि के जातकों को पीले रंग के फूल अर्पित करने चाहिए.

मकर

इस राशि के स्वामी शनि देव हैं. इन्हें नीला रंग बहुत प्रिय है. ऐसे में आप देवी दुर्गा को अपराजिता के नीले रंग के फूल अर्पित कर सकते हैं.

कुंभ

इस राशि के जातक देवी मां को नीले रंग के फूल अर्पित करें.

मीन

मीन राशि के जातकों को पीले रंग के फूल अर्पित करने चाहिए.

 

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

 

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