Chaitra Navratri 2022 : 51 शक्तिपीठों में से एक पाकिस्तान में, मुस्लिमों के बीच ‘नानी की हज’ नाम से है मशहूर

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri ) का पावन पर्व 2 अप्रैल से शुरू हो चुका है. नवरात्रि के मौके पर मंदिरों में माता के दर्शन के लिए सुबह से ही भीड़ जमा हो जाती है. इस दौरान शक्तिपीठ (Shaktipeeth) के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार लगती है. देवी पुराण (Devi Purana) के मुताबिक दुनियाभर में 51 शक्तिपीठ हैं, जिनमें से 42 भारत में हैं, 1 पाकिस्तान, 4 बांग्लादेश, 2 नेपाल, 1 तिब्बत और 1 श्रीलंका में हैं. लेकिन आज हम बात करेंगे पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज शक्तिपीठ की. कहा जाता है कि हिंगलाज शक्तिपीठ की यात्रा अमरनाथ से भी कठिन है. यहां पर हिंदू और मुस्लिमोंं के बीच कोई अंतर नहीं रह जाता. चैत्र नवरात्रि के मौके पर जानिए इस मंदिर के बारे में.

हिंदुओं के लिए ‘मां’ और मुस्लिमों के लिए ‘नानी का हज’

हिंगलाज मंदिर के लिए कहा जाता है कि ये 2000 सालों से भी ज्यादा पुराना है. यहां हिंदू और मुस्लिम के बीच फर्क कर पाना काफी मुश्किल हो जाता है. कई बार तो मंदिर के पुजारी भी मुस्लिम टोपी पहने दिखते हैं. हिंदू और मुस्लिम एक साथ माता की पूजा करते हैं. हिंदू लोग इस मंदिर में माता के रूप में पूजा करते हैं, वहीं मुस्लिम इसे ‘नानी की हज’ या ‘पीरगाह’ कहते हैं. यहां अफगानिस्तान, इजिप्ट और ईरान के अलावा बांग्लादेश, अमेरिका और ब्रिटेन से भी लोग दर्शन के लिए आते हैं.

बेहद खतरनाक है रास्ता

हिंगलाज माता मन्दिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त के हिंगलाज में हिंगोल नदी के तट पर स्थित है. इस मंदिर की यात्रा अमरनाथ से भी कठिन कहलाती है क्योंकि पहले जब यहां जाने के सही साधन उपलब्ध नहीं होते थे, तब इस मंदिर तक पहुंचने में 45 दिनों का समय लग जाता था. आज भी इस मंदिर तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है और अनेक बाधाओं को पार करना पड़ता है. ये हिंगोल नदी के पश्चिमी तट पर, मकरान रेगिस्तान के खेरथार पहाड़ियों की एक शृंखला के अंत में बना हुआ है. रास्ते में हजार फीट तक ऊंचे पहाड़ हैं, दूर तक फैला सुनसान रेगिस्तान, जंगली जानवरों से भरे घने जंगल और 300 फीट ऊंचा मड ज्वालामुखी जैसे खतरनाक पड़ाव को पार करने के बाद माता के दर्शन प्राप्त होते हैं.

हिंगलाज माता के रूप में पूजी जाती है शिला

यहां माता की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक छोटी प्राकृतिक गुफा में छोटे आकार की शिला है, जिसे हिंगलाज माता के रूप में पूजा जाता है. कहा जाता है कि मंदिर आने से पहले दो संकल्प लेने पड़ते हैं. पहला संकल्प माता के दर्शन करने के बाद सन्यास ग्रहण करने का और दूसरा संकल्प अपनी सुराही का पानी न देने का, भले ही आपका सहयात्री इसके लिए कितना ही परेशान हो. ये दोनों ही संकल्प भक्तों की परीक्षा के लिए हैं. अगर इन्हें पूरा नहीं किया तो आपकी यात्रा पूरी नहीं मानी जाती.

 

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