Chaitra Navratri 2023: मां कालरात्रि की पूजा में इस मंत्र को जपने पर मिलता है मनचाहा वरदान

नवरात्रि का सातवां दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा के लिए समर्पित है. शक्ति का यह स्वरूप बेहद डरावना है, जिसकी पूजा के शुभ प्रभाव से साधक तमाम तरह की बुरी शक्तियां बचा रहता है और उसे जीवन में कभी किसी भी प्रकार का भय नहीं सताता है क्योंकि उस पर मां कालरात्रि की हर समय कृपा बरसती रहती है. हिंदू मान्यता के अनुसार मां कालरात्रि दुष्टों का नाश करने और अपने भक्तों पर आशीर्वाद बरसाने वाली मानी गई हैं. आइए आज नवरात्रि के सातवें दिन देवी भगवती के इस भव्य स्वरूप की पूजा का पुण्यफल दिलाने वाला चमत्कारी मंत्र और उससे जुड़े उपाय के बारे में विस्तार से जानते हैं.

मां कालरात्रि की पूजा का महामंत्र

आज नवरात्रि के सातवें दिन जिस मां कालरात्रि की पूजा में मंत्र जप का बहुत महत्व है. मान्यता है कि यदि कोई भक्त देवी भगवती की पूजा में आज उनके मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम:’ का विधि-विधान से जप करता है तो उसके जीवन से जुड़ी बड़ी से बड़ी परेशानी जल्द ही दूर होती है. मां कालरात्रि की कृपा से उसे जीवन में किसी भी प्रकार के ज्ञात-अज्ञात शत्रु का भय नहीं रहता है.

नजर दोष से बचाता है मांं कालरात्रि का मंत्र

यदि आपको लगता है कि आप या फिर आपके परिवार का कोई दूसरा सदस्य या फिर आपके जीवन से जुड़ी तमाम चीजों को अक्सर किसी न किसी की बुरी नजर लग जाती है तो आपको आज नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि के नीचे दिए गये मंत्र का सात माला जप जरूर करना चाहिए. मान्यता है कि इस मंत्र का जप करने से साधक को पूरे साल नजर दोष से बचा रहता है.

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ॐ कालरात्रि दैव्ये नम:।।

मां कालरात्रि की पूजा का पुण्यफल

हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि के सातवें दिन भगवती के भव्य स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा में मंत्र जप करने से साधक के सुख-सौभाग्य में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं और वह देवी की कृपा से सभी प्रकार के सुखों को भोगता है. मान्यता है कि मां कालरात्रि बेहद दयालु और अपने साधकों पर कृपा बरसाने वाली हैं. माता कालरात्रि की पूजा से साधक के सभी पाप दूर होते हैं और उसे पुण्यफल की प्राप्ति होती है. माता के अशीर्वाद से बगैर किसी भय के जीवन से जुड़े सभी लक्ष्य को प्राप्त करता है. चूंकि देवी दुर्गा का सातवांं स्वरूप काल स्वरूप है, इसलिए इनकी साधना करने से साधक का अकाल मृत्यु से जुड़ा भय दूर होता है.

ये भी पढ़ें – Chaitra Navratri 2023: नवरात्रि में कैसे करें दुर्गा सप्तशती का पाठ, जानें सही पूजा विधि

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *