Chaturmas 2022 : भगवान विष्णु ही नहीं शिव को प्रसन्न करने के लिए करें ये काम, होगा धन लाभ!

हिंदू धर्म में धार्मिक कैलेंडर के अनुसार हर माह निर्धारित किया गया है. सनातन धर्म में हर माह का विशेष महत्व होता है, लेकिन इनके बीच खास समय भी आता है, जो देवी-देवताओं से सीधा संबंध रखता है. इन्हीं में से एक है चार्तुमास, जिसका संबंध भगवान विष्णु से माना जाता है. कहते हैं कि आषाढ़ माह के दौरान चार्तुमास (Chaturmas 2022) की शुरुआत होती है और ये चार माह तक चलता है. इस दौरान भगवान विष्णु ( Lord Vishnu ) निद्रा की मुद्रा में चले जाते हैं और वह देवउठनी पर ही जागते हैं. भगवान विष्णु से नाता होने के चलते इस दौरान लोग अलग-अलग तरीक से उनकी पूजा और पाठ में जुट जाते हैं. कोई इस दौरान व्रत रखता है, तो कोई सात्विक भोजन ग्रहण करता है. वैसे समय के धार्मिक अंतराल में साधना में लीन होना भी बहुत शुभ माना जाता है.

कुछ लोग इस दौरान रोजाना साधना में लीन होकर देवताओं की उपासना करते हैं. चार्तुमास के दौरान आप विष्णु ही नहीं देवो के देव महादेव यानी भगवान शिव व अन्य देवताओं की उपासना भी कर सकते है. शिव को प्रसन्न करके हर मनोकामना पूर्ण की जा सकती है. जानें आप किन ज्योतिष उपायों को अपनाकर अन्य देवताओं की कृपा पा सकते हैं.

चार्तुमास में करें ये उपाय

1. इन चार महीनों आपको नियमित रूप से मंदिर जाना चाहिए और बीच-बीच में दान करना चाहिए. आप चाहे तो अन्न, वस्त्र का दान कर सकते हैं. इसके अलावा छाया दान भी लाभकारी सिद्ध हो सकता है. मंदिर में सेवा करने से भी पुण्य की प्राप्ति हो सकती है.

2. चार्तुमास के दौरान भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा करनी चाहिए. प्रतिदिन सुबह उठकर स्नान करें और फिर मंदिर में जाकर भगवान शिव की उपासना करें. इस दौरान उन्हें गंगा जल वाला जल जरूर अर्पित करें.

3. वैसे तो भक्ति और भजन के लिए किसी खास समय का इंतजार नहीं करना चाहिए, लेकिन चार्तुमास के दौरान भगवान की भक्ति में ऐसे शुभ कार्यों को अवश्य करना चाहिए. इनसे देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा हासिल करके सुखी जीवन व्यतीत किया जा सकता है.

4. चार्तुमास के दौरान रोजाना तुलसी के पवित्र पौधे की पूजा करें और जल अर्पित करें. ये तरीका भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी को भी प्रसन्न करेगा. माता लक्ष्मी की कृपा मिलने से आपको धन की कमी नहीं होगी और धन लाभ के आसार बनेंगे.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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