Dalai Lama Birthday Special : बुद्ध के गुणों का साक्षात रूप माने जाते हैं दलाई लामा, जानें उनके ओजस्वी व्यक्तित्व के बारे में

दलाई लामा तिब्बतियों के सबसे बड़े धर्मगुरू की पदवी का नाम है. इस पदवी पर चौदवें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो (Dalai LamaTenzin Gyatso) विराजमान हैं. दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो का जन्म दिन 6 जुलाई को मनाया जाता है. उनका जन्म साल 1935 को पूर्वी तिब्बत (Tibet) के ओमान परिवार में हुआ था. दलाई लामा एक मंगोलियाई पदवी है जिसका मतलब होता है ज्ञान का महासागर होता है. दलाई लामा को बुद्ध के गुणों का साक्षात रूप माना जाता है. एक समय था जब दलाई लामा को तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष के रूप में देखा जाता था. लेकिन तिब्बत पर चीन के कब्जे की गुस्ताखी के बाद दलाई लामा भारत आ गए.

आधा से ज्यादा जीवन तिब्बतियों के लिए संघर्ष में बिता दिया

दलाई लामा 31 मार्च, 1959 को भारत आए थे. तब से आज तक वो हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज में रहकर तिब्बत की संप्रभुता के लिए अहिंसात्मक संघर्ष कर रहे हैं. तिब्बत की स्वायत्तता के लिए वो कुछ भी करने को तैयार हैं. अपने आधा से ज्यादा जीवन वो तिब्बतियों को न्याय दिलाने के संघर्ष के रूप में बिता चुके हैं. तिब्बत की मुक्ति के लिए अहिंसक संघर्ष जारी रखने के लिए परमपावन दलाई लामा को वर्ष 1989 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है.

आचरण में झलकती है विनम्रता

दलाई लामा के आचरण में उनकी विनम्रता झलकती है. अपने संबोधन के दौरान वो कभी किसी को ऐसा कोई शब्द नहीं बोलते हैं जो किसी के दिल को ठेस पहुंचाए. इतना ही नहीं, अपने संबोधन के दौरान वो अक्सर अपनी मां का जिक्र जरूर करते हैं. कहा जाता है कि उनके स्पर्श में ही लोगों के प्रति इतना प्रेम है कि वो अगर किसी के सिर पर हाथ रख दें तो मानो इंसान अपनी सारी तकलीफें भूल जाता है. दलाई लामा अपनी मां की तरह ही बेहद आशावादी हैं और उनका मानना है कि किसी न किसी दिन तिब्बतियों की तकलीफ को समझेंगे और इसलिए वो चीन सरकार के साथ निर्वासित तिब्बती सरकार की बातचीत जारी रहे, इसकी कोशिश जारी रहे.

व्यक्तित्व में महात्मा बुद्ध की झलक

तेनजिन ग्यात्सो दलाई लामा ने महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारा है, इसलिए उनके व्यक्तित्व में महात्मा बुद्ध की झलक नजर आती है. वे अपना धर्म दयालुता और मानवता बताते हैं. इसके अलावा भारत आने के बाद दलाई लामा महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित हुए थे और उन्होंने गांधी के जीवन आदर्श को भी आत्मसात कर लिया था. दलाई लामा ही वो शख्स हैं, जो दुनियाभर के तिब्बतियों को एक मंच पर लाए. आज निर्वासित तिब्बत सरकार का बाकायदा चुनाव होता है.

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