Garuda Purana : इन दो स्थितियों में स्त्री को देखने की गलती करते हैं जो पुरुष, तो मृत्यु के बाद नर्क भोगना पड़ता है…

गरुड़ पुराण (Garuda Purana) को महापुराण की संज्ञा दी जाती है. अधिष्ठातृ देव भगवान विष्णु हैं. गरुड़ पुराण में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार, निष्काम कर्म की महिमा के साथ साथ यज्ञ, दान, तप, तीर्थ आदि शुभ कर्मों का महत्व बताते हुए जीवन जीने के सही तरीकों के बारे में बताया गया है. साथ ही मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है, किस कर्म के लिए कौन सा दंड भोगना पड़ता है और स्वर्ग व नर्क से जुड़ी तमाम बातों के बारे में बताया गया है. माना जाता है कि मृत्यु के बाद यदि गरुड़ पुराण का पाठ ​कराया जाए, तो इससे मृतक की आत्मा को सत्य का अहसास हो जाता है और मोह त्यागने में आसानी होती है. ऐसे में आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है. इसके अलावा मृतक के परिजनों को सही और गलत कर्मों के बीच का अंतर मालूम पड़ता है.

गरुड़ पुराण में करीब 19 हजार श्लोक हैं जो पुण्य और पाप के बारे में बताते हैं. गरुड़ पुराण में स्त्रियों के दो ऐसे कर्मों के बारे में बताया गया है, जिन्हें करते समय किसी पुरुष को उन पर दृष्टि नहीं डालनी चाहिए. ऐसा करने से उसे मृत्यु के बाद नर्क में सजा झेलनी पड़ती है. जानिए इन कर्मों के ​बारे में.

फीड कराते समय न देखें

किसी भी नवजात के लिए मां का दूध बहुत जरूरी होता है. इससे उसे पोषण मिलता है. अपने बच्चे की भूख को शांत करने के लिए मां उसे फीड कराती है. फीड कराते समय किसी भी महिला पर पुरुषों को अपनी नजर नहीं डालनी चाहिए. इसे गरुड़ पुराण में पाप की श्रेणी में रखा गया है. कहा जाता है कि अगर कोई पुरुष ऐसे समय पर अपनी कु​दृष्टि स्त्री पर डालता है, तो उसे मत्यु के पश्चात इस कृत्य के लिए कठोर दंड सहना पड़ता है.

स्नान के दौरान न देखें

पहले के समय में हर जगह पर स्नानगृह नहीं होते थे, तब स्त्रियां नदियों में स्नान करने जाया करती थीं या किसी खुले स्थान पर आड़ करके स्नान किया करती थीं. उस समय को देखते हुए ये गरुड़ पुराण में ये नियम बताया गया है कि स्नान के समय किसी भी महिला पर पुरुष को अपनी नजर नहीं डालनी चाहिए. इस कृत्य को भी पाप की श्रेणी में रखा गया है. ऐसा करने से पुरुष को पाप का भागी बनना पड़ता है और इस कर्म के लिए मृत्यु पश्चात इसकी सजा भुगतनी पड़ती है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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