Good Friday : जानिए किस दिन है गुड फ्राइडे, इसे क्यों मनाया जाता है !

ईसाई (Christianity) धर्म में गुड फ्राइडे का विशेष महत्व है. इस दिन ईसा मसीह को निर्दोष होने के बावजूद सूली पर लटका दिया गया था. जिस दिन ये घटना घटी, उस दिन शुक्रवार था. तब से इस दिन को गुड फ्राइडे (Good Friday), ब्लैक फ्राइडे और होली फ्राइडे जैसे नामों से जाना जाता है. कहा जाता है कि सूली पर लटकने के तीन दिनों बाद यीशू फिर से जीवित हो गए थे. उस दिन संडे था. इसलिए गुड फ्राइडे के तीसरे दिन ईस्टर संडे (Easter Sunday) मनाया जाता है. ईसाई धर्म में इन दोनों दिनों को ही बेहद पवित्र माना गया है. लेकिन सोचने वाली बात ये है कि आखिर ​जिस दिन यीशू को सूली पर लटकाया गया, उस दिन को गुड फ्राइडे क्यों कहा जाता है. अगर आपके जेहन में भी ये सवाल चलता रहता है, तो यहां जानिए इसका जवाब.

यीशू की महानता का दिन है गुड फ्राइडे

ईसा मसीह को ईसाई धर्म में ईश्वर का बेटा कहा जाता है. करीब 2000 वर्ष पहले की बात है, तब ईसा मसीह अन्याय और अज्ञानता का अंधकार दूर करने के लिए लोगों को शिक्षा दे रहे थे. उस समय यहूदियों के कट्टरपन्थी रब्बियों को ये पसंद नहीं आया और उन्होंने रोमन गवर्नर पिलातुस से इस बात की​ शिकायत की. रोमनों को हमेशा यहूदी क्रान्ति का डर रहता था. इसलिए उन्होंने यहूदियों को खुश करने के लिए ईसा को सूली पर चढ़ा देने की सजा सुना दी. प्रेम की पराकाष्ठा का उदाहरण पेश करने के लिए यीशू निर्दोष होते हुए भी सूली चढ़ गए. जब उन्हें सूली पर चढ़ाने के लिए सलीब पर लटकाया गया, तब वे उन लोगों की अज्ञानता के लिए भगवान से उन्हें माफ कर देने की प्रार्थना कर रहे थे. जिस दिन ये घटना घटी थी, उस दिन शुक्रवार का दिन था और यीशू ने सबके सामने त्याग, दयालुता और प्रेम की पराकाष्ठा का उदाहरण पेश किया था. यीशू की महानता को देखते हुए इस दिन को गुड फ्राइडे कहा जाने लगा.

इस तरह मनाया जाता है गुड फ्राइडे

हर साल गुड फ्राइडे के दिन लोग चर्च जाकर ईसा मसीह के प्रतीक क्रॉस को चूमकर यीशू को याद करते हैं. इस दिन चर्च में घंटा नहीं बजाया जाता, बल्कि न ही कैंडिल जलाई जाती है. लोग लकड़ी से खटखट की आवाज करते हैं. इस दिन अधिक से अधिक नेक काम किए जाते हैं. जरूरतमंद लोगों की मदद की जाती है और उन्हें दान और चंदा वगैरह दिया जाता है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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