Good Luck Signs on Body Parts : भाग्यशाली मानी जाती हैं वो लड़कियां, जिनके शरीर पर होते हैं ये 5 निशान

हमारे शरीर पर तिल, मस्सा आदि कई तरह के चिन्ह होते हैं. कुछ समय के साथ बन जाते हैं और जन्म से होते हैं. ज्यादातर लोग इन पर ध्यान नहीं देते. लेकिन सामुद्रिक शास्त्र (Samudrik Shastra) में इन चिन्हों के मायने बताए गए हैं. सामुद्रिक शास्त्र ज्योतिष की ही शाखा मानी जाती है. सामुद्रिक शास्त्र में इन चिन्हों को शुभ और अशुभ माना गया है. ज्योतिष (Astrology) लड़के और लड़कियों के लिए शरीर के अलग अलग हिस्सों पर तमाम चिन्हों के शुभ और अशुभ होने की बात कही गई है. आइए आपको बताते हैं उन लकी साइन्स के बारे में जो किसी लड़की के शरीर पर होना शुभ माना जाता है.

शरीर पर इन चिन्हों को माना जाता है लकी

1- सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार माना जाता है कि अगर किसी लड़की के नाभि के नीचे या आसपास तिल या मस्सा है तो वे अपने लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए भाग्यशाली मानी जाती हैं. इसके अलावा पेट के बायीं तरफ बर्थमार्क होने पर भी उन्हें भाग्यवान माना जाता है. ऐसी लड़कियों के जीवन में कभी धन धान्य की कमी नहीं रहती. उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार हर चीज प्राप्त हो जाती है.

2- लड़कियों के पैर के तलवे पर अगर त्रिकोण का चिन्ह बना हो तो इसे बहुत ही सौभाग्यशाली माना जाता है. हालांकि ये चिन्ह कम ही लड़कियों के पैरों के तलवे में मिलता है. ऐसी लड़कियां पूरे परिवार का बेड़ा पार कर सकती हैं. ये स्वभाव से बहुत सुलझी हुई होती हैं और दूसरों की हमेशा मदद करती हैं.

3- समुद्र शास्त्र के मुताबिक जिन महिलाओं की आंखों का आकार हिरण के समान होता है, वे बहुत खुशनसीब होती हैं. उन्हें जीवन में वो सब कुछ मिलता है, जो वो पाना चाहती हैं. ये दूसरों के लिए भी खुशियों की सौगात लेकर आती हैं.

4- जिन लड़कियों के पैर के तलवे पर शंख, कमल या चक्र की आकृति बनी होती हैं, वो अपने पार्टनर के लिए भी लकी साबित होती हैं. वे खुद तो बड़े पदों पर आसीन होती ही हैं, साथ ही इनके पार्टनर भी उच्च पदों को प्राप्त करते हैं.

5- जिन लड़कियों की नाक पर या आसपास तिल या मस्सा होता है, उन्हें भी किस्मत वाला समझा जाता है. इन्हें जीवन में काफी कुछ अपने भाग्य की बदौलत ही मिलता है. इनके जीवन में सुख समृद्धि की कोई कमी नहीं होती है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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