Guru Purnima 2025: वह धरा जहां गुरु को ईश्वर से पहले माना गया, भगवान श्रीकृष्ण बने शिष्य
गुरु पूर्णिमा उज्जैन के लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उसकी आत्मा, परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। यह भूमि श्रीकृष्ण से लेकर आधुनिक विद्वानों तक गुरु-शिष्य परंपरा की साक्षी रही है। यहां ज्ञान केवल शब्द नहीं, बल्कि साधना और अनुभव से अर्जित होता है।
