Guruwar ke Upay: पैसों की तंगी से हैं परेशान तो गुरुवार के दिन जरूर करें ये आसान उपाय

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दिन का स्वामी बृहस्पति है. इस दिन को धन, समृद्धि, ऐश्वर्य, ज्ञान और संतान का कारक माना जाता है. इस दिन बहुत से लोग व्रत रखते हैं. विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. इस दिन आप कई तरह के उपाय (Guruwar ke Upay) भी कर सकते हैं. इससे आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. करियर में सफलता मिलेगी. किसी भी कार्य को करने में बाधाएं आ रही हैं तो आप इन उपायों कर सकते हैं. ये इन बाधाओं से छुटकारा दिलाने में मदद करेंगे. विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए भी आप इस दिन कई तरह के उपाय कर सकते हैं. आइए जानें कौन से ये उपाय.

गुरुवार के दिन करें ये काम

इस दिन पीले रंग का इस्तेमाल अधिक करें. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनें. पीले फलों और मिठाई का सेवन करें.

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है. स्नान के बाद ॐ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप करें. इससे आर्थिक स्थिति में सुधार होता है.

इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा एक साथ करें. बृहस्पतिवार को व्रत कथा का पाठ करें. इससे दांपत्य जीवन सुखमय होता है. घर में सुख-समृद्धि आती है.

गुरुवार के दिन गाय को आटे की लोई खिलाएं. लोई में चने की दाल, गुड़ और हल्दी डालकर खिलाएं. ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है. स्नान करने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करें.

इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दाल, केले और पीले कपड़ों का दान करें. गुरुवार के दिन किसी से उधार ने लें. ऐसा करने से आपकी कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर होती है. इस कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है.

गुरुवार के दिन पूजा करने के बाद अपनी कलाई और गर्दन पर हल्दी का टीका लगाएं. ऐसा करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है. इससे हर कार्य में व्यक्ति को सफलता मिलती है.

गुरुवार के दिन केले के वृक्ष को जल अर्पित करें. इसके सामने देसी घी का दीपक जलाएं. गुरु के 108 नामों का उच्चारण करें. इससे विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.

गुरुवार के दिन पूजा घर में हल्दी की माला लटकाएं. कार्यस्थल पर पीले रंग की वास्तुओं का इस्तेमाल करें. भगवान लक्ष्मी और नारायण को लड्डू का भोग लगाएं. इससे व्यवसाय में चल रही बाधाएं दूर होती हैं.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *