Jagannath Rath Yatra : जगन्नाथ यात्रा के दस दिवसीय पर्व के बीच निभाई जाती हैं ये रस्में, जानिए इनके क्या हैं मायने !

1 जुलाई को जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Yatra) शुरू हो चुकी है. हर साल आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को जगन्नाथ यात्रा निकाली जाती है. जगन्नाथ यात्रा का ये पर्व करीब दस दिनों त​क चलता है. जगन्नाथ यात्रा की दुनियाभर में बहुत ज्यादा मान्यता है. माना जाता है कि इस यात्रा में शामिल होने मात्र से जाने अनजाने किए गए तमाम पापों का अंत हो जाता है. इसलिए जगन्नाथ यात्रा में शामिल होने के लिए दूर दूर से भक्त यहां आते हैं. दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व (Festival) में कई तरह की रस्में भी निभाई जाती हैं. इस बार रथ यात्रा के पर्व का समापन 12 जुलाई को होगा. आइए आपको ​बताते हैं कि किस दिन कौन सी रस्म निभाई जाएगी और किस रस्म के क्या मायने हैं.

छेरा पहरा

रथ यात्रा वाले दिन तीनों रथों के निकलने से पहले इस रस्म को पूरा किया जाता है. इसके बाद तीनों रथों पर लकड़ी के घोड़ों को लगाया जाता है. फिर जगन्नाथ भगवान के भक्त इन रथों को करीब तीन किलोमीटर तक खींचते हैं. इसके बाद तीनों रथों में सवार होकर भगवान अपनी मौसी गुंडिचा के मंदिर पहुंचते हैं. वहां कुछ दिन विश्राम करने के बाद तीनों वापस लौटते हैं.

9 जुलाई हो होगी रथ यात्रा की वापसी

आषाढ़ मास की दसवीं को रथों की वापसी होती है. इस दौरान सभी रथों को मंदिर के ठीक सामने लाया जाता है, लेकिन प्रतिमाएं एक दिन तक रथ में ही रहती हैं. इस बार भगवान जगन्नाथ मौसी के घर विश्राम करने के बाद 9 जुलाई को बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम के साथ घर वापसी करेंगे.

सुना बेशा रस्म

देवशयनी एकादशी के दिन सुना बेशा रस्म की जाएगी. देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) का धार्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन तीनों रथ मंदिर के सिंह द्वार पर पहुंचेंगे. इस दिन भगवान को स्वर्ण आभूषण पहनाए जाते हैं. इस बार ये रस्म 10 जुलाई को होगी.

अधर पना रस्म

इस दिन कुएं से निकाले गए पानी, मक्खन, पनीर, शक्कर, केला, जायफल, काली मिर्च और अन्य मसालों को डालकर पना तैयार किया जाता है और इस पने को भगवान को पिलाया जाता है. इसे अधर पना रस्म कहा जाता है. इस बार ये रस्म 11 जुलाई को होगी.

नीलाद्री बीजे

दस दिनों के पर्व की सबसे आखिरी रस्म है नी​लाद्री बीजे. इसी के साथ इस पर्व का समापन हो जाता है. इसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को श्रीमंदिर के गर्भगृह के रत्नसिंहासन पर एक बार फिर से विराजमान कराया जाता है. इस बार ये रस्म 12 जुलाई को होगी.

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