Mahavir Jayanti 2022 : जानें भगवान महावीर द्वारा कही गईं वो बातें, जो जीवन में आपके काम जरूर आएंगी

आज 14 अप्रैल को देशभर में जैन धर्म (Jain Dharma) के 24वें व अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती मनाई जा रही है. उनका जन्म चैत्र मास की त्रयोदशी तिथि पर हुआ था. महावीर स्वामी (Mahavir Swami) का जन्म एक राजघराने में हुआ था, लेकिन 30 वर्ष की आयु में ही वे विरक्त हो गए और उन्होंने सारे सांसारिक सुख त्याग दिए. इसके बाद ज्ञान की खोज में उन्होंने 12 वर्षों तक कठोर तप किया. इसके बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई. महावीर स्वामी ने जैन धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए काफी कुछ किया. मगध व अनेक गणराज्यों में अपनी जड़ें जमाने के बाद उन्होंने जैन धर्म का दक्षिण भारत की ओर भी प्रसार किया. कहा जाता है कि चन्द्रगुप्त मौर्य ने दक्षिण भारत में जाकर ही जैन धर्म को अंगीकार किया था. महावीर स्वामी सत्य और अहिंसा के समर्थक थे. उन्होंने लोगों को जीवन के पांच सिद्धांत सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य के महत्व के बारे में बताया. आज महावीर जयंती (Mahavir Jayanti) के मौके पर जानते हैं महावीर स्वामी द्वारा कही गईं वो बातें जो जीवन में आपके काम जरूर आएंगी.

महावीर स्वामी के उपदेश

सभी प्राणियों को अपने प्राण प्यारे हैं. सबको सुख अच्छा लगता है, दुख अच्छा नहीं लगता. हिंसा सभी को बुरी लगती है. जीना सबको प्यारा लगता है. सभी जीव जीवित रहना पसंद करते हैं. सबको जीवन प्रिय होता है.

ईश्वर का कोई अलग अस्तित्व नहीं है. सही दिशा में सर्वोच्च प्रयास किए जाएं तो कोई भी व्यक्ति देवत्व को प्राप्त कर सकता है.

एक व्यक्ति जलते हुए जंगल के बीच में एक ऊंचे वृक्ष पर बैठा है. वो सभी जीवित प्राणियों को मरते हुए देखता है. लेकिन ये नहीं समझता कि जल्द ही उसका भी यही हाल होने वाला है. ऐसा व्यक्ति मूर्ख है.

जिस तरह आपको दुख पसंद नहीं है, उसी तरह दूसरे भी इसे पसंद नहीं करते. इस​लिए किसी भी व्यक्ति के साथ वो व्यवहार करो जो आपको अपने लिए पसंद हो.

जो लोग जीवन के सर्वोच्च उद्देश्य से अनजान हैं, वे व्रत रखने, धार्मिक आचरण के नियम मानने और ब्रह्मचर्य और ताप का पालन करने के बावजूद निर्वाण (मुक्ति) प्राप्त करने में सक्षम नहीं होंगे.

सभी जीवों के प्रति अहिंसक होकर रहना चाहिए. सच्चा संयमी वही है, जो मन, वचन और शरीर से किसी की हिंसा नहीं करता.

अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है. किसी के अस्तित्व को मिटाने की अपेक्षा उसे शांति से जीने दो और स्वयं भी शांति से जियो इसी में सभी का कल्याण है. इस संसार में जितने भी जीव हैं उनके प्रति दया भावना रखो.

जितना अधिक आप पाते हैं, उतना अधिक आप चाहते हैं. लाभ के साथ-साथ लालच बढ़ता जाता है. जो दो ग्राम सोने से पूर्ण किया जा सकता है, वो दस लाख से नहीं किया जा सकता.

जीतने पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए और न ही हारने पर दुख होना चाहिए. जिसने भय को जीत लिया, वो ही समभाव को अनुभव कर सकता है.

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