Makar Sankranti 2026: भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति पर ही क्यों त्यागा शरीर? जानें इसकी वजह
भीष्म पितामह, जो अर्जुन के तीक्ष्ण बाणों से छलनी होने के बावजूद 58 दिनों तक ‘शरशय्या’ (बाणों की शय्या) पर लेटे रहे। उनके पास अपनी इच्छा से मृत्यु का चुनाव करने का वरदान था, फिर भी असहनीय पीड़ा सहते हुए उन्होंने मकर संक्रांति यानी ‘उत्तरायण’ होने का इंतजार किया। इसके पीछे का रहस्य आध्यात्मिक और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है।
