Masik Shivratri 2023: आज है मासिक शिवरात्रि, जानें किस पूजा से मिलेगा महादेव से मनचाहा वरदान

सनातन परंपरा में भगवान शिवएक ऐसे देवता हैं जिनकी न सिर्फ पूजा बल्कि वो खुद भी बहुत ही सरल और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं. यही कारण है कि उनके भक्त उन्हें भोलेनाथ कहकर बुलाते हैं. हिंदू धर्म में भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए शिवरात्रि को बहुत ज्यादा शुभ माना गया है जो कि प्रत्येक मास की चतुर्दशी तिथि को पड़ती है. हिंदू मान्यता के अनुसार प्रत्येक मास में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि पर पूजा करने पर साधक को शिव संग शक्ति का भी आशीर्वाद मिलता है. आइए मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और उसके धार्मिक महत्व को विस्तार से जानते हैं.

मासिक शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी जिसे मासिक शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है वह अप्रैल महीने की 18 तारीख को दोपहर 01:27 बजे से प्रारंभ होकर 19 अप्रैल 2023 को प्रात:काल 11:23 बजे तक रहेगी. इस दिन अभिजीत मुहूर्त प्रात:काल 11:55 से लेकर दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा तो वहीं अमृत काल रात्रि 08:30 से 10:01 बजे तक रहेगा. इन दोनों ही समय शिव पूजन करना शुभ रहेगा.

मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि

भगवान शिव के इस व्रत को कोई भी भक्त रख सकता है. यदि आप इस व्रत को उठाना चाहते हैं तो इसे महाशिवरात्रि से उठाना चाहिए और प्रत्येक मास की शिवरात्रि पर प्रात:काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद शुभ मुहूर्त में पूरे विधि-विधान से शिव संग माता पार्वती की भी पूजा करना चाहिए. शिवरात्रि की पूजा में शिवलिंग पर महादेव की प्रिय चीजें जैसे गंगाजल, बेलपत्र, शमीपत्र, भस्म, रुद्राक्ष, दूध, दही, शकक्र आदि चढ़ाना चाहिए.

पूरे दिन व्रत रखते हुए शिव के साधक को एक बार फिर शाम को स्नान करने के बाद शाम के समय में शुभ मुहूर्त में शिव का एक बार फिर से पूजन और शिवरात्रि के व्रत की कथा तथा शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए. शिव पूजन के अंत में साधक को व्रत एवं पूजा का पूरा फल पाने और भूलचूक की माफी के लिए महादेव की कपूर और दीप जलाकर आरती अवश्य करना चाहिए. महाशिवरात्रि के व्रत में साधक को फलहार करना चाहिए.

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(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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