Nag Panchami 2025: केवल नाग पंचमी पर ही खुलते हैं इस मंदिर के द्वार, साल भर होती सिर्फ प्रतीकात्मक पूजा, जानिए क्यों
नागचंद्रेश्वर मंदिर में भक्तों को नागदेवता के एक साथ दो रूपों में दर्शन होते हैं। मंदिर के अग्रभाग में भगवान नागचंद्रेश्वर स्वयं अपने सात फनों से सुशोभित हो रहे हैं। सर्पासन पर भगवान शिव व पार्वती भी विराजित हैं। बताया जाता है 11 वीं शताब्दी में निर्मित इस अद्भुत दिव्य प्रतिमा को नेपाल से यहां लाया गया है। इस प्रकार की विश्व में दूसरी कोई प्रतिमा नहीं है।
