Nirjala Ekadashi 2022 : बेहद श्रेष्ठ मानी जाती है निर्जला एकादशी, इस दिन की गईं ये भूल पड़ सकती है भारी

सनातन धर्म में व्रत एवं त्योहारों के जरिए आज भी लोग अपनी संस्कृति से जुड़े हुए हैं. लोग इन व्रत और त्योहारों से जुड़े नियमों का पालन करके अपने जीवन में सुख एवं समृद्धि लाने की कोशिश करते हैं. इन्हीं में से एक है, निर्जला एकादशी का व्रत, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि अगर कोई निर्जला एकादशी ( Nirjala Ekadashi 2022 ) के व्रत को रख ले, तो उसे साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है. इस विशेष व्रत से कई धार्मिक कहानियां जुड़ी हुई हैं. कहते हैं कि इस दिन विश्वामित्र ने संसार को गायत्री मंत्र सुनाया था और इसलिए इसे महा एकादशी ( Maha Ekadashi ) भी पुकारा जाता है. इसका संबंध पांडव पुत्र भीम से भी है. कहते हैं कि वे व्रत में भूखे नहीं रह पाते थे, तभी उन्होंने श्रृषि मुनि की सलाह पर निर्जला एकादशी का व्रत रखा और तब से इसे भीमसेनी एकादशी भी पुकारा जाता है.

इसमें उपवास रखने के अलावा जल भी ग्रहण करने की अनुमति नहीं होती और इसी कारण ये बहुत कठिन व्रत माना जाता है. भले ही आप इस दिन व्रत न रखें, लेकिन कुछ ऐसी गलतियां भी न करें, जो आपके लिए भारी साबित हो जाए. हम आपको कुछ ऐसी सामान्य गलतियां बताने जा रहे हैं, जो लोग अक्सर इस दिन करते हैं और इस कारण उनके जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं.

इस दिन न करें ये गलतियां

स्नान न करना: कुछ लोगों की आदत होती है कि वे कभी-कभी आलस के चलते नहाने से परहेज कर जाते हैं. इस दिन न नहाना आपके लिए बहुत भारी साबित हो सकता है. इस दिन जरूर नहाएं और नियमों के तरत पूजा पाठ भी करें.

दान न करना: निर्जला एकादशी के दिन लोग पुण्य पाने के लिए जल ही नहीं वस्त्र, खाद्य सामग्री व ऐसी दूसरी चीजों का दान करते हैं, जो लोगों के काम आ सके. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो घर आए भिक्षु को खाली हाथ लौटाने की भूल करते हैं. निर्जला एकादशी पर व्रत ही नहीं दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन आप भले ही दान करने न जा पाएं, लेकिन घर आए किसी भी भिक्षु को खाली हाथ न लौटाएं.

चावल का सेवन: ऐसा माना जाता है कि एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए. कहते हैं कि ये गलती देवताओं को नाराज सकती है. कई बार लोग जाने या अनजाने में इस गलती को कर देते हैं, लेकिन उन्हें बाद में शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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