Ramzan 2022 : जानिए क्यों बेहद पवित्र माना जाता है रमजान का महीना !

माह-ए-रमजान को इस्लाम (Islam) में बेहद पाक महीना माना गया है. कहा जाता है कि इसी महीने में शब-ए-कद्र में अल्लाह ने पवित्र धर्मग्रंथ कुरान को नाजिल किया था. रमजान के महीने (Month of Ramzan) को नेक कामों का महीना भी कहा जाता है, इसीलिए इसे मौसम-ए-बहार भी बुलाते हैं. इस दौरान मुसलमानों के लिए एक महीने तक रोजे रखना, रात में तरावीह की नमाज पढ़ना और कुरान (Quran) तिलावत करना जरूरी होता है. इसके अलावा जकात और फितरा का भी विशेष महत्व माना गया है. इस्लामी मान्यता है कि रमजान के महीने में किया गए एक नेक काम का भी कई गुना सवाब मिलता है. ये महीना खुद के सुधार का महीना माना गया है, जो हर मुस्लिम को संयम, प्रेम और भाईचारे की सीख देता है. जानिए रमजान के महीने को इतना पवित्र क्यों माना जाता है!

अल्लाह की रहमत का महीना

रमजान के महीने को अल्लाह की रहमतों का महीना माना गया है. इसलिए हर मुस्लिम इस माह में ज्यादा से ज्यादा समय अल्लाह की इबादत करता है. कहा जाता है कि इस माह में हर नेक काम का कई गुणा सवाब मिलता है. इस दौरान अल्लाह जन्नत के दरवाजे खोल देता है और बरकत की बारिश करता है. अल्लाह की रहमत पाने के लिए मुसलमान पूरे एक माह तक कठिन नियमों के साथ रोजे रखकर, नमाज पढ़कर और कुरान की तिलावत करके अल्लाह की इबादत करते हैं.

आत्ममंथन का महीना

रमजान का महीना आत्ममंथन का महीना माना गया है. ये हर मुसलमान को गुनाहों का प्रायश्चित करने का अवसर देता है. रमजान के महीने में रखा जाने वाला रोजा सिर्फ खाने पीने के ही नियमों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस दौरान किसी को गलत निगाह से देखना, किसी का दिल दुखाना, किसी की बुराई करना भी गुनाह माना गया है. इस बीच खानपान पर नियंत्रण के साथ व्यक्ति अपनी इन आदतों पर भी नियंत्रण करता है, जिससे उसकी भावनाएं शुद्ध होती हैं. रमजान के महीने में आत्ममंथन करके खुद के अंदर झांकने का प्रयास करना चाहिए और अपनी भूल को सुधारना चाहिए. इससे अल्लाह खुश होते हैं और रहमत और बरकत बरसाने के साथ तमाम गुनाहों को माफ कर देते हैं.

नेकी का महीना

रमजान के महीने में हर हैसियतमंद मुसलमान के लिए जकात बहुत जरूरी बताया गया है. जकात एक ​तरह का दान है. इसमें मुसलमान को अपनी मेहनत की सालभर की कमाई का 2.5 फीसदी हिस्सा जरूरतमंदों को दान करना जरूरी है. इसके अलावा फितरा यानी चैरिटी का भी विशेष महत्व माना गया है. चैरिटी व्यक्ति अपनी हैसियत और स्वेच्छानुसार कर सकता है. जकात और फितरा के जरिए व्यक्ति एक दूसरे के दर्द को समझने का प्रयास करता है और भाईचारे की भावना रखकर लोगों की मदद करता है. इस तरह से रमजान का महीना नेकी का महीना भी माना गया है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *