Rangbhari Ekadashi 2024 Date: इस दिन मनाई जाएगी रंगभरी एकादशी, नोट करें सही तिथि और पूजा विधि
धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती काशी गए थे।
धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती काशी गए थे।
नई दिल्ली, 22 जून। भारतीय वैदिक ज्योतिष प्रत्यक्ष विज्ञान है। इसमें ग्रहों की गति, स्थिति और युतियों के द्वारा मनुष्य का सटीक भविष्य कथन करने की सामर्थ्य है। दो या दो से अधिक ग्रहों की युति अर्थात् साथ होने से अनेक
वसंत पंचमी का पर्व हर साल श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस अवसर पर भक्त विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा करते हैं और उन्हें प्रिय वस्तुओं का भोग अर्पित करते हैं। चलिए आपको पूरी खबर बताते…
कई बार मन में यह विचार आता है कि क्या हमारी प्रार्थनाएं भगवान तक पहुंचती रही हैं या नहीं। ऐसे में आज हम आपको कुछ संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं।
आज चंद्रदेव का कन्या से तुला राशि में प्रवेश भावनात्मक गहराई से संतुलन और सौंदर्य की ओर संक्रमण का संकेत देता है। जहां सुबह का समय आत्मविश्लेषण और मानसिक उलझनों से भरा हो सकता है, वहीं दोपहर के बाद सामाजिक, रिश्तों और आर्थिक पहलुओं में सुधार की संभावना प्रबल हो जाती है।
हिंदू धर्म में भगवान की पूजा-अर्चना करने के दौरान आरती करने का रीति रिवाज है. माना जाता है कि बिना आरती के कोई भी पूजा सफल नहीं मानी जाती. इसके कई धार्मिक महत्व भी हैं. आइए जानें इससे जुड़े कुछ जरूरी नियम