Safalta ke Mantra: महाबली हनुमान के इन 5 गुणों से मिलती है जीवन की बड़ी सीख

हिंदू मान्यता के अनुसार पवनपुत्र हनुमान एक ऐसे देवता हैं जो सबसे ज्यादा पूजे जाते हैं. शायद यही कारण है कि सभी संकटों से रक्षा और मनचाहा वरदान देने वाले मंगलमूर्ति हनुमान जी की प्रतिमा आपको पूर्व से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक तमाम मंदिरों में देखने को मिल जाएगी. सनातन परंपरा में हनुमान जी को बल, बुद्धि और विद्या का देवता माना गया है, यही कारण है कि हर आम और खास के साथ एक पढ़ने-लिखने वाले छात्र के भी हनुमान सबसे प्रिय देवता हैं.

हिंदू धर्म में हनुमत उपासना एक ऐसा विश्वास हैं, जिसके होने पर साधक जीवन की बड़ी से बड़ी चुनौतियों का आसानी से सामना करते हुए उस पर विजय प्राप्त करता है. कलयुग में बजरंग बली की साधना न सिर्फ बुरी बलाओं से बचाने वाली और उनके गुण जीवन को बड़ी सीख देने वाले हैं. आइए आज राम भक्त हनुमान की जयंती पर उनके उन सद्गुणों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जिसे अपनाते ही व्यक्ति को जीवन में मनचाही सफलता मिलती है.

1. उदार व्यक्तित्व

महाबली हनुमान जी तमाम शक्तियों के स्वामी होने के बाद भी बहुत ही उदार मन के स्वामी थे. जब वे लंका के राजा रावण के सामने जाते हैं तो वहां पर वे स्वयं को शक्ति का पुंज न बता कर भगवान राम का दूत बताते हुए वहां पर उनके नाम की मर्यादा को बनाए रखते हैं. जबकि रामकथा में अंगद ऐसा कर पाने में असमर्थ रहते हैं.

2. जिज्ञासु मन

हनुमान जी के तमाम गुणों में उनका जिज्ञासु होना उनकी प्रसिद्धि का एक बड़ा कारण रहा. ज्ञान को अर्जित करने लिए जब वे भगवान सूर्य के पास जाते हैं तो सूर्यदेव ने इसे असंभव बताते हुए कहा कि मैं निरंतर चलता रहता हूं, इसलिए तुम ज्ञान नहीं अर्जित कर सकते. इस पर हनुमान जी ने उन्हें आश्वासन दिया कि आप इसकी चिंता न करें आप जब मुझे शिक्षा देंगे मेरा मुख आपके मुख के सामने ही रहेगा. इस प्रकार उन्होंने लगातार सूर्यदेव के साथ चलते हुए ज्ञान प्राप्त किया.

3. समर्पण की भावना

रामभक्त हनुमान के जीवन से हमें अपने कार्य या फिर कहें लक्ष्य के प्रति समर्पण होने की सीख मिलती है. हनुमान जी अपने पूरे जीवन में भगवान राम के हर आदेश का पालन करते हुए उसे सफल तरीके से सिद्ध किया लेकिन कभी भी उसका खुद श्रेय नहीं लिया. उन्होंने अपने सभी कार्यों का श्रेय प्रभु श्री राम को ही दिया.

4. लक्ष्य प्राप्ति तक आराम नही

हनुमान जी के जीवन से हमें सीख मिलती है कि जीवन से जुड़ा लक्ष्य जब तक प्राप्त न हो जाए हमें निरंतर परिश्रम और प्रयास करते रहना चाहिए बिल्कुल वैसे ही जैसे हनुमान जी जब माता सीता की खोज में लंका जा रहे होते हैं और मेनाक पर्वत पर आराम करने का आग्रह करता है, लेकिन वे मना कर देते हैं. वे इस बात पर अडिग रहते हुए कहते हैं कि राम काज कीन्हे बिना मोहि कहां विश्राम.

5. बल और बुद्धि का सदुपयोग

हनुमान जी ने जीवन में अपनी सभी शक्तियों और बुद्धि का हमेशा सदुपयोग किया. उन्हें जब जरूरत पड़ी तो उन्होंने अपने आपको छोटे स्वरूप में बदल लिया और सुरसा के मुंह के भीतर जाकर बाहर निकल आए और आवश्यकता पड़ने पर उन्होंने पूंछ को बढ़ाकर पूरी लंका को भस्म कर दिया. ऐसे में हमें बजरंगी के इस गुण को अपनाते हुए अपनी बल और बुद्धि का हमेशा सदुपयोग करना चाहिए.

ये भी पढ़ें: अप्रैल महीने में कब कौन सा पड़ेगा तीज-त्योहार, देखें पूरा कैलेंडर

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *