Shani Amavasya 2023: शनि अमावस्या पर बन रहे हैं ये 5 शुभ योग, बरसेगी शनि कृपा!

सनातन धर्म में हर महीने आने वाली अमावस्या का विशेष महत्व है और इस दिन स्नान, दान आदि करना फलदायी होता है। वैसे, तो प्रत्येक अमावस्या का अपना एक अलग स्थान होता है लेकिन जब कोई अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है तो उसका महत्व बढ़ जाता है। शनिवार के दिन पड़ने के कारण इस अमावस्या को शनि अमावस्या कहा जाता है। एस्ट्रोसेज का यह विशेष ब्लॉग आपको शनि अमावस्या 2023 की तिथि, महत्व और इस दिन बनने वाले 5 शुभ संयोगों से भी अवगत कराएगा। तो आइये सबसे पहले जानते हैं वर्ष 2023 में कब है शनि अमावस्या? 

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शनि अमावस्या 2023 की तिथि और समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, एक वर्ष में शनि अमावस्या दो बार आती है और यह दिन न्याय के देवता भगवान शनि को समर्पित होता है। इस वर्ष मौनी अमावस्या के दिन ही यानी कि 21 जनवरी 2023 को शनिश्चरी अमावस्या भी पड़ रही है। शनि अमावस्या तिथि का आरंभ 21 जनवरी 2023 को सुबह 06 बजकर 19 मिनट पर होगा जबकि इसका समापन 22 जनवरी 2023 की रात 02 बजकर 25 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार मौनी अमावस्या और शनि अमावस्या को 21 जनवरी के दिन मनाया जाएगा। इसके अलावा, शनि अमावस्या के दिन एकसाथ पांच योगों का भी निर्माण हो रहा है। तो अब नज़र डालते हैं इस अमावस्या पर बनने वाले योगों पर। 

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शनि अमावस्या 2023 को ख़ास बना रहे हैं ये शुभ योग

30 साल बाद बना ये दुर्लभ संयोग 

शनि अमावस्या के दिन भगवान शनि की पूजा का अत्यंत महत्व है और ऐसे में, माघ माह की अमावस्या या यूँ कहें कि मौनी अमावस्या भी इस दिन पड़ने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। यह अमावस्या 21 जनवरी को पड़ रही है और 30 साल बाद इस अमावस्या के दौरान शनि देव अपनी राशि कुंभ में स्थित हैं जो कि इनकी मूलत्रिकोण राशि भी है। इसके परिणामस्वरूप, यह एक दुर्लभ संयोग का निर्माण कर रहे हैं जिसका लाभ जातकों को मिल सकता है। 

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20 साल बाद माघ मास में शनि अमावस्या 

जैसे कि हम आपको इस बारे में बता चुके हैं कि जब भी कोई अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है तो उसे शनिचरी अमावस्या कहते हैं और इस बार माघ मास में आने वाली पहली अमावस्या, शनैश्चरी अमावस्या है। हालांकि, इस तरह का संयोग बेहद कम ही बनता है और ऐसा संयोग अब से 20 साल पहले यानी कि 01 फरवरी 2003 को बना था जब मौनी और शनि अमावस्या दोनों को एक ही दिन मनाया गया था। इसके बाद, ये संयोग 4 साल बाद, 06 फरवरी 2027 को बनेगा। इसके अलावा, इस दिन चंद्र देव शनि देव के स्वामित्व वाली राशि मकर में प्रवेश करेंगे और ऐसे में, शनि अमावस्या पर शनि देव अपने भक्तों के समस्त कष्ट दूर करेंगे। 

शनि अमावस्या के दिन बन रहे ये शुभ संयोग 

हिंदू पंचांग और ज्योतिष के अनुसार, शनि अमावस्या पर शनि ग्रह के मूल त्रिकोण राशि में होने से दुर्लभ संयोग का निर्माण हो रहा है लेकिन इसके अलावा भी इस दिन 4 योग बन रहे हैं। शनि अमावस्या के अवसर पर चतुर्ग्रही योग, खप्पर योग, समसप्तक योग और षडाष्टक योग का भी निर्माण हो रहा है। 

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माघ मास में शनि अमावस्या का महत्व 

शनि अमावस्या पर बनने वाले शुभ संयोगों के बाद अब हम बात करेंगे माघ महीने में शनि अमावस्या के महत्व की। हिंदू नववर्ष के माघ मास में शनिवार के दिन अमावस्या का होना बहुत ख़ास माना गया है और इस तिथि को स्नान और दान का महापर्व कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी पुण्य कर्म व्यक्ति को तपस्या और यज्ञ के समान फल प्रदान करता है।  

स्कंद, पद्म और विष्णुधर्मोत्तर पुराण के अनुसार, माघ माह में पड़ने वाली शनि अमावस्या के दिन तीर्थ स्नान या पवित्र नदियों में किये गये स्नान से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही, इस दिन व्यक्ति द्वारा किया गया दान कई यज्ञों के बराबर पुण्य फल देता है। शनि अमावस्या पर श्राद्ध या तर्पण करने से पूर्वजों के आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। 

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शनि अमावस्या के दिन जरूर आज़माएं ये उपाय 

शनि अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनि अमावस्या पर सरसों के तेल में बनी हुई पूड़ी का भोग शनिदेव को लगाएं। .शनि देव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि मंत्रों का जाप करें। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए शनि अमावस्या के दिन चावल और दूध की खीर बनाकर गोबर के उपले जलाकर उन पर पितरों के निमित्त खीर का भोग अवश्य लगाएं। भगवान शनि की पूजा करते समय 5, 7, 11 या 21 बार शनि मंत्र का जाप करें। इसके बाद, शनि चालीसा का पाठ करें और अंत में शनि देव की आरती के साथ पूजा का समापन करें। 

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