Suroop Dwadashi 2022: सुरूप द्वादशी आज, बन रहे पांच शुभ संयोग, जानें व्रत पूजन का विधान, महत्व
महाभारत के श्वमेधिक पर्व के अनुसार जो पौष मास की द्वादशी को उपवास करके जो विधि-विधान पूर्वक ‘नारायण’ नाम से भगवान विष्णु की पूजा करता है, वह वाजिमेध-यज्ञ का फल पाता है। इस व्रत को करने मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है, मनोकामना पूर्ण होती है।
