Varuthini Ekadashi 2023: एकादशी की पूजा में इन नियमों की अनदेखी करने पर टूट जाता है व्रत
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की कृपा दिलाने वाली एकादशी के व्रत को बहुत ज्यादा शुभ और पुण्यदायी माना गया है. पंचांग के अनुसार अप्रैल महीने की दूसरी एकादशी 16 तारीख को पड़ेगी. पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्णपक्ष को पड़ने वाली यह एकादशी वरुथिनी एकादशी के नाम से जानी जाती है. जिसका विधि-विधान से शुभ मुहूर्त में पूजन करने पर साधक को पुण्यफल की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि एकादशी का व्रत साधक की सभी मनोकामनाओं को पूरा करके मोक्ष दिलाने वाला होता है. आइए वरुथिनी एकादशी व्रत के जरूरी नियम जानते हैं.
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वरुथिनी एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले शाम से चावल का सेवन करना छोड़ देना चाहिए और व्रत वाले दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए.
वरुथिनी एकादशी व्रत वाले साधक को तन-मन और वचन तीनों से पवित्र रहना चाहिए और भूलकर भी न तो किसी को अपशब्द कहना चाहिए और न ही तामसिक चीजों का सेवन करना चाहिए.
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत प्रिय है. ऐसे में वरुथिनी एकादशी करने वाले व्यक्ति को न सिर्फ भगवान विष्णु को पूजा में पीले रंग के वस्त्र अर्पित करना चाहिए बल्कि खुद भी पीले रंग के कपड़े पहनने का प्रयास करना चाहिए. वरुथिनी एकादशी पर भगवान श्री विष्णु की पूजा पीले रंग के आसन पर बैठकर करना चाहिए.
वरुथिनी एकादशी वाले दिन भगवान विष्णु की पूजा में पीले रंग का पुष्प, पीले रंग का फल और पीले रंग की मिठाई भगवान विष्णु को चढ़ाना चाहिए.
वरुथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु से मनचाहा वरदान पाने के लिए उनकी पूजा गाय के दूध से बने शुद्ध घी का प्रयोग करें. मान्यता है कि यदि कोई साधक एकादशी के दिन गाय के दूध से बने शुद्ध घी का दीया जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करता है तो उसके घर हमें धन-धान्य भरा रहता है.
वरुथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा तब तक अधूरी है जब तक आप उन्हें भोग में तुलसी दल नहीं चढ़ाते हैं. ऐसे में इस व्रत में जो कुछ भी भोग श्री हरि को लगाएं उसमें तुलसी की पत्तियां जरूर डालें. लेकिन ध्यान रहे कि तुलसी की पत्तियां एक दिन पहले ही तोड़ लें और एकादशी वाले दिन भूलकर भी न तोड़ें नहीं आपको पुण्य की जगह पाप लगेगा.
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान श्री विष्णु के मंत्रों का जप करने के लिए पीले चंदन की माला अत्यंत ही शुभ मानी गई है, लेकिन यदि यह न हो तो व्यक्ति को तुलसी की माला से श्री हरि के मंत्रों का जाप करना चाहिए क्योंकि इससे भी वही पुण्यफल प्राप्त होता है.
वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान की पूजा करने के बाद आरती करना बिल्कुल न भूलें. हिंदू मान्यता के अनुसार आरती करने से व्यक्ति की पूजा में की कोई भी कमी-पेशी या भूल माफ हो जाती है और उस व्रत या पूजा का पूरा पुण्यफल प्राप्त होता है.
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(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)
