Vastu tips: वास्तु के हिसाब से घर में ऐसे रखें लाफिंग बुद्धा, धन की कमी होगी दूर!

लाफिंग बुद्धा को घर में नियमों के तहत रखने से लाइफ की कई परेशानियों खत्म की जा सकती है. भले ही लाफिंग बुद्धा का मुख्य संबंध चीनी शास्त्र फेंगशुई से हो, लेकिन भारतीय वास्तु शास्त्र में भी इसका महत्व बताया गया है. वास्तु के मुताबिक घर में लाफिंग बुद्धा को रखना शुभ माना जाता है. भारतीय वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर में लाफिंग बुद्धा ( Laughing Buddha tips ) को रखने से सुख ( happiness in life ) एवं समृद्धि आती है. कहा जाता है कि लाफिंग बुद्धा का संबंध धन से होता है और इसी कारण लोगों आर्थिक समस्याओं ( financial problem ) को दूर करने के लिए लाफिंग बुद्धा की मदद लेते हैं. इतना ही नहीं लोग घर के अलावा व्यापार में लाभ के लिए इन्हें अपने कार्यस्थल पर रखते हैं. कई बार इन्हें गुड लक के तौर पर दोस्तों या परिचितों को गिफ्रट भी किया होगा.

माना जाता है कि लाफिंग बुद्धा महात्मा बुद्ध के एक जापानी शिष्य थे. उनका असली नाम होता था. जब उन्होंने बुद्ध से शिक्षा प्राप्त कर ली तो अचानक वे जोर-जोर से हंसने लगे और उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया कि वे जहां भी रहेंगे लोगों को हंसाएंगे. वैसे घर में लाफिंग बुद्धा को कहीं भी रखा नहीं जा सकता. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन्हें रखने के लिए सही दिशा का ज्ञान होना जरूरी है. हम आपको बताएंगे कि आप लाफिंग बुद्धा को घर में कहा रख सकते हैं और कहां नहीं. जानें..

घर में यहां रखें लाफिंग बुद्धा

वैसे लाफिंग बुद्धा की प्रतिमा कई तरह की मिलती है, लेकिन अगर आप धन की कमी को झेल रहे हैं, तो इसके लिए घर में धन की पोटली लिए हुए लाफिंग बुद्धा की प्रतिमा को स्थापित करें. मान्यता है कि इनकी इस प्रतिमा को घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने रखें. यहां प्रतिमा को जमीन से 30 इंच या फिर ज्यादा से ज्यादा 32 इंच की ऊंचाई पर रखना अच्छा होता है. ऐसा करने से घर में मौजूद नेगेटिव एनर्जी दूर होगी और धन के लिए आय के नए आयाम खुलेंगे.

यहां न रखें प्रतिमा

कई बार लोग लाफिंग बुद्धा की प्रतिमा को बिना जानकारी के ऐसी जगह रख देते हैं, जिसे वास्तु के मुताबिक ठीक नहीं माना जाता है. कहा जाता है कि लाफिंग बुद्धा की प्रतिमा को किचन, खाने के एरिया, बेडरूम और टॉयलेट में बिल्कुल नहीं रखना चाहिए. ये एक तरह की भूल होती है और ऐसे में आपको आर्थिक तंगी झेलनी पड़ सकती है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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