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Vijaya Ekadashi 2022 : भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था विजया एकादशी का महत्व, व्रत के दौरान जरूर पढ़ें ये कथा

हर माह में दो बार एकादशी (Ekadashi Vrat) का व्रत रखा जाता है. हर एकादशी को अलग नाम से जाना जाता है और सभी का महत्व भी अलग अलग बताया गया है. फाल्गुन मास (Phalguna Month) की कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि ये एकादशी शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली है, साथ ही इस व्रत को रखने से एकादशी का तीन गुना फल प्राप्त होता है. इसे रखने से सुख समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है. विजया एकादशी व्रत कथा (Vijaya Ekadashi Vrat Katha) के मुताबिक लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले स्वयं श्रीराम ने विजया एकादशी का व्रत रखा था. वहीं द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण ने इस व्रत की महिमा धर्मराज युधिष्ठिर को बताई थी, जिसके बाद युधिष्ठिर ने ये व्रत रखा था. इसके बाद पाण्डवों ने महाभा​रत के युद्ध में विजय प्राप्त की थी.

इस बार विजया एकादशी का व्रत 27 फरवरी को रखा जाएगा. अगर आप भी इस व्रत को रखने जा रहे हैं, तो पूजा के दौरान विजया एकादशी की व्रत कथा जरूर पढ़ें. ताकि आपका उद्देश्य सफल हो सके.

ये है व्रत कथा

द्वापरयुग में एक बार धर्मराज युद्धिष्ठिर ने श्रीकृष्ण भगवान से फाल्गुन एकादशी व्रत के महत्व के बारे में पूछा. तब श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया कि विजया एकादशी व्रत के बारे में भगवान ब्रह्मा ने सबसे पहले नारद को बताया था, इसके बाद त्रेतायुग में श्रीराम ने इस व्रत को रखा. इसकी कथा भी प्रभु श्रीराम से ही जुड़ी हुई है.

कथा के मुताबिक जब भगवान श्रीराम ने माता सीता के हरण के बाद रावण से युद्ध करने के लिए सुग्रीव की सेना को साथ लेकर लंका की ओर प्रस्थान किया तो लंका से पहले विशाल समुद्र को पार करना काफी मुश्किल था. श्रीराम मनुष्य अवतार में थे, इसलिए कोई चमत्कार नहीं करना चाहते थे, बल्कि आम मनुष्यों की तरह ही इस समस्या को निपटाना चाहते थे.

इस बीच श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण से समुद्र पार करने का उपाय पूछा तो उन्होंने कहा कि हे प्रभु वैसे तो आप सर्वज्ञ हैं, लेकिन फिर भी आप मुझसे ही इस बारे में जानना चाहते हैं, तो यहां से आधा योजन की दूरी पर वकदालभ्य मुनिवर निवास करते हैं. अगर हम उनके पास जाएंगे तो कोई न कोई समाधान जरूर मिल जाएगा.

इसके बाद भगवान श्रीराम मुनिवर के पास पहुंचे और उन्हें प्रणाम कर अपनी समस्या उनके सामने रखी. तब मुनि ने उन्हें बताया कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है. अगर आप समस्त सेना समेत इस व्रत को रखेंगे तो न सिर्फ समुद्र को पार कर जाएंगे, ​बल्कि लंका पर भी विजय प्राप्त करेंगे.

इसके बाद जब विजया एकादशी का दिन आया तो श्रीराम और उनकी सेना ने मुनिवर के कहे अनुसार ​विधि विधान से ये व्रत रखा. इसके बाद उन सभी ने रामसेतु बनाकर समुद्र को पार किया और लंकापति रावण को परास्त कर युद्ध में विजय प्राप्त की.

 

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

 

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