Vijaya Ekadashi 2023: शुभ योग में मनाई जाएगी विजया एकादशी: जानें राशि अनुसार उपाय!

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है और हर माह में दो एकादशी आती हैं। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी 2023 का व्रत रखा जाता है। अन्य एकादशी की तरह यह भी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु जी की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को हर कार्य में विजय की प्राप्ति होती है। साथ ही जातक को शत्रुओं पर जीत हासिल होती है। इस व्रत की चर्चा पद्म पुराण और स्कंद पुराण में की गई है। इस एकादशी व्रत का महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अर्जुन को बताया था। ख़ास बात यह है कि इस बार विजया एकादशी पर दो बेहद शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। तो आइये जानते हैं एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में विजया एकादशी पर कौन से योग बन रहे हैं। साथ ही जानें पूजा विधि, महत्व, व्रत कथा, राशि के अनुसार उपाय और भी बहुत कुछ।

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विजया एकादशी 2023: तिथि व मुहूर्त

विजया एकादशी तिथि 16 फरवरी 2023 दिन बृहस्पतिवार को सुबह 05 बजकर 35 मिनट पर प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन 17 फरवरी 2023 दिन शुक्रवार को 2 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी।

विजया एकादशी 2023 व्रत पारण का समय

विजया एकादशी पारण मुहूर्त: 17 फरवरी 2023 को 08 बजकर 03 मिनट से 09 बजकर 13 मिनट तक।

अवधि: 1 घंटे 9 मिनट

हरि वासर समाप्त होने का समय: 17 फरवरी 2023 को 08 बजकर 03 मिनट पर।

इस दिन बन रहे हैं ये दो शुभ योग

विजया एकादशी 2023 के दिन दो बेहद शुभ योग बन रहे हैं। इस योग में किए गए कार्य ख़ुशहाली प्रदान करते हैं और जाप किए गए सभी मंत्र शुभ फलदायक साबित होते हैं। इस योग में भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजन करने पर सफलता मिलती है। 

हर्षण योग: 16 फरवरी 2023 को सुबह 07 बजकर 01 मिनट पर।

वज्र योग: 17 फरवरी 2023 को सुबह 03 सुबह 34 मिनट पर।

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विजया एकादशी 2023 का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने व निर्जला व्रत करने से जातक के जीवन में सुख, शांति व वैभव बना रहता है और साथ ही, सभी प्रकार की नकारात्मकता समाप्त हो जाती है। शास्त्रों में लिखा है कि इस व्रत को करने से स्वर्ण दान, भूमि दान, अन्न दान और गौ दान से अधिक पुण्य फल और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि कोई आपसे शत्रुता रखता है तो आपको विजया एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए।

विजया एकादशी 2023 पूजा विधि

इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प लें।घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।इसके बाद धूप-दीप, फूल, मिठाई, चंदन और तुलसी आदि से भगवान का पूजन करें।भगवान विष्णु को तुलसी अधिक प्रिय है इसलिए इस दिन तुलसी को पूजन में जरूर शामिल करें।भगवान की व्रत कथा सुने और श्री हरि की आरती करें।व्रत से एक दिन पहले तामसिक भोजन ग्रहण न करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।इस व्रत में अन्न विशेष रूप से चावल का सेवन नहीं करना चाहिए इसलिए इस दिन केवल फलाहार ग्रहण करें।एकादशी की रात में श्री हरि के नाम का भजन कीर्तन करते हुए जगराता करें।द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा देकर विदा करें। फिर व्रत का पारण करें। 

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व्रत कथा

हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान राम के वनवास काल के दौरान जब रावण माता सीता का हरण करके लंका ले गया, तब प्रभु श्री राम ने सुग्रीव का परामर्श लेकर लंका जाने का निर्णय लिया। लंका की चढ़ाई के रास्ते में सागर आड़े आ रहा था। आगे जाने का कोई रास्ता साफ दिखाई नहीं दे रहा था। प्रभु श्रीराम ने चिंता व्यक्त करते हुए लक्ष्मण से पूछा कि हम आगे कैसे जा सकते हैं, तब लक्ष्मण ने कहा था कि थोड़ी दूरी पर वकदालभ्य मुनि का आश्रम है। हमें उनसे आगे के लिए मार्गदर्शन लेना चाहिए जिसके बाद श्रीराम, लक्ष्मण समेत वकदाल्भ्य मुनि के आश्रम में पहुंचे। उन्हें प्रणाम करके अपना प्रश्न उनके सामने रख दिया। मुनिवर ने विजया एकादशी के बारे में बताते हुए कहा कि ‘हे राम आप अपनी सेना समेत फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत रखें, इस व्रत से आप निश्चित ही समुद्र को पार कर सकेंगे और रावण को पराजित कर विजय प्राप्त करेंगे।’ श्री राम ने तब एकादशी की तिथि के आने पर अपनी सेना समेत मुनिवर के बताए अनुसार एकादशी का व्रत रखा और सागर पर पुल का निर्माण कर लंका पर चढ़ाई की जिसके बाद भगवान राम और रावण का युद्ध हुआ जिसमें रावण की हार हुई। तब से इस एकादशी को विजया एकादशी के रूप में जाना जाता है। इसके बारे में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया था।

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विजया एकादशी पर राशि अनुसार करें ये अचूक उपाय

विजया एकादशी 2023 के दिन किए जाने वाले राशि अनुसार उपायों के बारे में जानें:

मेष राशि 

विजया एकादशी के दिन 5 या 11 तुलसी की पत्तियां लेकर उन पर हल्दी का टीका लगाकर श्री विष्णु भगवान को अर्पित करना चाहिए और इस दौरान मन ही मन प्रार्थना करनी चाहिए। ऐसा करने से आप अपने शत्रुओं को परास्त करने में सफल रहेंगे।

वृषभ राशि 

इस दिन वृषभ राशि के जातक दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल भरकर विष्णु भगवान को अर्पित करें। ऐसा करने से आपके भीतर सकारात्मकता में वृद्धि होगी। 

मिथुन राशि 

इस एकादशी के दिन चंदन की खुशबू वाली धूपबत्ती भगवान विष्णु को अर्पित करें। ऐसा करने से आपके वैवाहिक जीवन में प्यार बना रहेगा।

कर्क राशि 

विजया एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और फिर उसकी मिट्टी नाभि और माथे पर लगाएं। ऐसा करने से आप सभी रोगों से छुटकारा पा सकते हैं। 

सिंह राशि 

सिंह राशि के जातक इस दिन पूजा करते समय 5 या 11 सफेद कौड़ियां लेकर भगवान विष्णु के सामने रखें और साथ ही कौड़ियों की भी पूजा करें। पूजा के बाद उन कौड़ियों को एक पीले रंग के कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख लें। ऐसा करने से बिज़नेस में वृद्धि होगी।

कन्या राशि 

कन्या राशि के जातक इस दिन व्रत करें और धूप, दीप, चंदन आदि से भगवान विष्णु की पूजा करें लेकिन अगर आप व्रत न रख सके, तो सिर्फ सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु की पूजा जरूर करें। ऐसा करने से गृहस्थ जीवन में चल रही समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।

तुला राशि 

इस दिन सूजी का हलवा बनाकर, संभव हो तो उसमें थोड़ी-सी केसर डालकर श्री विष्णु भगवान को भोग लगाएं। ऐसा करने से आपके प्रेम-संबंधों में मधुरता आएगी। 

वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि के जातकों को इस दिन विद्या यंत्र की स्थापना करनी चाहिए। इससे घर से सभी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

धनु राशि 

विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु के आगे घी का दीपक जलाकर भगवान का स्मरण करना चाहिए। ऐसा करने से आपके परिवार में खुशियों का माहौल बना रहेगा।

मकर राशि 

मकर राशि के जातक इस दिन भगवान विष्णु के मंत्र का 108 बार जाप करें। मंत्र इस प्रकार है – ‘ऊँ नमो भगवते नारायणाय’। ऐसा करने से हर तरह की प्रतियोगिता में आपकी जीत सुनिश्चित होगी।

कुंभ राशि 

कुंभ राशि के जातकों को विजया एकादशी के दिन सुबह स्नान आदि के बाद पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए और हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।

मीन राशि 

विजया एकादशी के दिन घर के उत्तर-पूर्व दिशा को अच्छे से साफ-सफाई करके वहां जौ के दाने बिछाकर, उस पर मिट्टी का कलश पानी से भरकर स्थापित करना चाहिए और उसमें थोड़ी-सी दूब डालनी चाहिए। अब उस मिट्टी के कलश को ढक कर उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति रखें और भगवान की विधि-विधान से पूजा करें। जब पूजा हो जाए तो मूर्ति सहित कलश को किसी मंदिर में दान कर दें और बाकी इस्तेमाल की हुई सामग्री को गंगाजल या तालाब में प्रवाहित कर दें या पीपल के पेड़ के पास रख दें। ऐसा करने से आपको हर काम में सफलता मिलेगी।

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