Vimal Raj Yog: जानें कैसा बनता है जातक की कुंडली में विपरीत राजयोग

कुंडली में बनने वाले राजयोग व्यक्ति को कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंचाते हैं। राजयोग कुछ विशेष ग्रहों की युति और सितारों की उपस्थिति से बनते हैं। राजयोग को सबसे भाग्यशाली और शुभ योग माना जाता है क्योंकि यह व्यक्ति को जीवन में भाग्य, वैभव, धन और सफलता प्रदान करता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, लगभग 30 राजयोग और तीन प्रकार के विपरीत राजयोग होते हैं। एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में हम आज तीन विपरीत राज योगों में से एक विमल राजयोग के बारे में चर्चा करेंगे। साथ ही, इसके प्रभाव व निर्माण के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे।

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विपरीत राजयोग क्या है?

वैदिक ज्योतिष में विपरीत राजयोग को बहुत ही शुभ योग माना जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ है “विपरीत”। यानी नकारात्मक भावों वाले ग्रहों के संयोजन से बनने वाले योग को विपरीत राजयोग कहा जाता है। साधारण शब्दों में कहे तो, किसी भी कुंडली में जब छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी अन्य दो भावों में से किसी एक में स्थित होते हैं तो ऐसी स्थिति में विपरीत राजयोग का निर्माण होता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में विपरीत राजयोग हो तो उस व्यक्ति को अच्छे चरित्र, विकास, स्वास्थ्य, समृद्धि, शक्ति और विभिन्न सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होती है।

17 जनवरी 2023 को शनि कुंभ राशि में गोचर करेंगे और इसी के साथ यह विपरीत राजयोग बनाएंगे। विपरीत राजयोग तीन प्रकार के होते हैं:

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हर्ष राजयोग: जब कुंडली में छठे भाव का स्वामी आठवें या बारहवें भाव में हो, तब हर्ष योग बनता है।

सरला राजयोग: यह राजयोग कुंडली में तब बनता है जब आठवें भाव के स्वामी छठे या बारहवें भाव में बैठे हो।

विमल राजयोग: जब बारहवें भाव के स्वामी छठे या आठवें भाव में स्थित हो, तो विमल योग बनता है। 

विमल राजयोग: निर्माण और अर्थ

जैसा कि हम पहले बता चुके हैं कि विमल राजयोग विपरीत राजयोग का ही एक भाग है। विमल योग तब बनता है जब कुंडली के बारहवें भाव के स्वामी छठे या आठवें भाव में स्थित हो। यदि बारहवें भाव का स्वामी अपने ही भाव में, छठे या आठवें भाव में हो तो जातक को विमल नाम के राजयोग का फल प्राप्त होगा। दरअसल पाप भाव के स्वामी अगर कुंडली के अशुभ भाव में उपस्थित हो तो ये जातक को हानि नहीं पहुंचाते हैं, बल्कि इस भाव से मिलने वाले बुरे परिणामों को भी रोक देते हैं। जानिए, किसी व्यक्ति की कुंडली में कैसे बनता है विमल राजयोग। 

अगर बारहवें भाव का स्वामी छठे भाव में हो तो ऐसा जातक विद्वान होगा और अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर उनकी धन-संपत्ति का लाभ उठाने वाला होगा। ऐसे जातक किसी से डरते नहीं हैं। अगर बारहवें भाव के स्वामी आठवें भाव में हो तो जातक परम ज्ञानी और गुप्त विद्या का स्वामी बन जाता है। वह जब भी मुसीबत में घिरेगा तब कोई ना कोई अदृश्य शक्ति उसकी मदद करेगी। जब बारहवें भाव के स्वामी बारहवें भाव में ही होते हैं, तो व्यक्ति राजसी जीवन का आनंद लेता है।

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