Vishalakshi Devi Temple: बाबा विश्वनाथ की नगरी में सिर्फ शिव ही नहीं शक्ति पूजा का भी है महत्व, जानें कैसे?

काशी सिर्फ भगवान शिव की महिमा के लिए ही नहीं बल्कि शक्ति पीठ के लिए अपना अलग ही महत्व रखता है. यहां शिव के साथ ही शक्ति की भी पूजा की जाती है. शास्त्रों के मुताबिक 51 शक्ति पीठों में एक शक्ति पीठ काशी में भी मौजूद है. विशालाक्षी देवी का ये शक्ति पीठ भगवान शिव से कुछ ही दूरी पर मौजूद है. देश-दुनिया से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के साथ ही विशालाक्षी देवी के दर्शन के लिए भी काशी पहुंचते हैं. काशी वो जगह है जहां शिव और शक्ति एक साथ विराजमान हैं.

माता का यह शक्ति पीठ करीब 5 हजार साल पुराना है.विशालाक्षी देवी का ये मंदिर दक्षिण भारतीय कला शैली का अद्भुद नमूना है. धार्मिक मान्यता है कि जिन जगहों पर देवी सती के जले हुए अंग गिरे वहां पर शक्तिपीठ स्थापित हो गए. 51 शक्तिपीठों में एक शक्तिपीठ काशी में भगवान शिव के मंदिर के पास मीर घाट पर मौजूद है.धार्मिक मान्यता के मुताबिक यहां पर देवी सती के कवच और कुंडल गिरे थे, इसीलिए यहां विशालाक्षी देवी का सिद्धपीठ स्थापित हो गया.

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क्या है विशालाक्षी की दो प्रतिमाओं की महिमा

भगवान भोलेनाथ के दर्शन के साथ ही देवी दर्शन का भी खास महत्व है. मां विशालाक्षी के भक्त उनको दक्षिण वाली माता भी कहते हैं. मंदिर में मां की दो प्रतिमाएं हैं. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु माता की पुरानी और नई दोनों प्रतिमाओं के दर्शन करते हैं. मां की दोनों प्रतिमाओं को चल और अचल मानकर पूजा जाता है. दरअसल मां की पुरानी प्रतिमा गलती से खंडित हो गई थी इसीलिए नई प्रतिमा को स्थापित किया गया था. मंदिर में दोनों ही प्रतिमाएं मौजूद हैं. हर दिन देवी का श्रृंगार और पूजा-पाठ पूरे विधि विधान से किया जाता है.

शिव के साथ ही बरसती है शक्ति की कृपा

नवरात्रि के समय में इस मंदिर की अलग ही छठा देखने को मिलती है. शिव को पूजने वाले भक्त देवी की कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए विशालाक्षी देवी के दर पर दौड़े चले जाते हैं. मान्यता है कि विशालाक्षी देवी अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूरा करती हैं. काशी की इस पावन धरती पर शिव के साथ ही शक्ति के विराजमान होने से यहां की महिमा और भी बढ़ जाती है. शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान भोलेनाथ इसी शक्तिपीठ में विश्राम करते हैं. विशालाक्षी देवी को अन्नपूर्णा के समान माना जाता है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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