Vishu 2022 : केरल में आज से होगी नए साल की शुरुआत, जानिए विषु पर्व कैसे मनाया जाता है !

विषु पर्व केरल (Kerala) में धूमधाम से मनाया जाता है. ये पर्व मलयालम कैलेंडर (Malayalam Calendar) के पहले महीने ‘मेदम’ के पहले दिन मनाया जाता है. इसी दिन से मलयालम नव वर्ष की शुरुआत होती है. ज्यादातर ये त्योहार अप्रैल महीने के मध्य में 14 या 15 अप्रैल को मनाया जाता है. इस बार विषु पर्व आज 15 अप्रैल को शुक्रवार के दिन मनाया जा रहा है. विषु पर्व पर लोग मंदिरों में भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के दर्शन कर नए साल बेहतर होने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं. इस दिन केरल के सबरीमाला मंदिर में व्यापक स्तर पर विशेष आयोजन किया जाता है. मलयालम मान्यता के अनुसार ये पर्व सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना गया है. इस दिन को सौभाग्य व अच्छी किस्मत के आगमन का प्रतीक माना जाता है. इस दिन पूरे केरल में सार्वजनिक अवकाश रहता है. जानते हैं विषु पर्व को केरल के लोग कैसे मनाते हैं और इस पर्व से जुड़ी अन्य जरूरी बातें.

इस दिन श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध

कहा जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके लोगों को उसके आतंक से मुक्त कराया था. इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के अलावा उनके श्रीकृष्ण स्वरूप की भी पूजा की जाती है. इस दिन को सूर्य की वापसी का दिन भी माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार एक बार लंकापति रावण ने सूर्य के पूर्व दिशा से निकलने पर रोक लगा दी थी. रावण की मृत्यु के बाद से सूर्य ने फिर से पूर्व दिशा से उदित होना शुरू किया. इसके बाद विषु पर्व मनाने की प्रथा का आरंभ हुआ. केरलवासियों के लिए विशु पर्व शुभता और खुशहाली का प्रतीक है.

ऐसे मनाया जाता है विषु पर्व

इस दिन हर घर में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है. केरलवासी अपने-अपने घरों में रात 12 बजे ही भगवान कृष्ण की मूर्ति के सामने नए वस्त्र, आभूषण, दर्पण, सब्जियां, फल, रामायण या श्रीमद्भगवद्गीता को सजाकर रख देते हैं. सुबह जागने के बाद सबसे पहले इसी के दर्शन किए जाते हैं. इस रस्म को विषुक्कणी कहा जाता है. माना जाता है कि इससे पूरे साल भगवान की कृपा बनी रहती है और लोगों के घरों में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है. इस दिन बड़े लोग छोटे बच्चों को आशीर्वाद स्वरूप में तोहफा या कुछ पैसे भी देते हैं.

विषु भोजन की रस्म

विषुक्कणी की रस्म निभाने के बाद भक्त मंदिर जाकर श्रीहरि के दर्शन करते हैं. उन्हें विषु तरह के व्यंजनों से भोग लगाया जाता है. इस भोग को एक खास किस्म के बर्तन में लगाया जाता है, इस बर्तन को उराली कहा जाता है. उराली में खीरा, नारियल, कद्दू, कच्चा केला, अनानास, सुपारी और चावल को रखा जाता है. इसके बाद बारी आती है विषु भोजन की, जो लोग दोपहर में करते हैं. इसमें 26 तरह के व्यंजनों को परोसा जाता है. इस दिन पुरुष धोती पहनते हैं और महिलाएं कसुवु साड़ी पहनती हैं. इस दिन तमाम लोग बच्चों को बाल कृष्ण की तरह सजाते हैं.

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