Yamuna Chhath 2023: यमुना छठ पर किस पूजा से कटेंगे शनि के कष्ट और मिलेगा मनचाहा वरदान

सनातन परंपरा में तमाम बड़ी और पवित्र नदियों में से एक मां यमुना का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व बताया गया है. पौराणिक मान्यता के अनुसार यमुना नदी के पिता भगवान सूर्यदेव हैं और यम इनके भाई हैं. यमुनोत्री से निकलकर प्रयागराज के संगम पर गंगा नदी में मिल जाने वाली इस नदी में चैत्र मास के शुक्लपक्ष की षष्ठी के दिन स्नान, दान और पूजन का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व बताया गया है क्योंकि इसी दिन इनका पृथ्वी पर प्राकट्य माना जाता है. हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि के छठवें दिन को यमुना जयंंती भी कहा जाता है. आइए यमुना छठ की पूजा विधि और महत्व को विस्तार से जानते हैं.

यमुना छठ की पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार यमुना छठ का पर्व हर साल चैत्र मास के शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार इस साल यह षष्ठी तिथि 26 मार्च 2023 को सायंकाल 04:32 से प्रांरभ होकर 27 मार्च 2023 को सायंकाल 05:27 बजे तक रहेगी.

यमुना छठ की पूजा विधि

यमुना छठ के दिन प्रात:काल यमुना नदी में स्नान करें. यदि यमुना नदी में न पहुंच पाएं तो घर में ही स्नान करते समय देवी यमुना का ध्यान करें. इसके बाद पूरे विधि-विधान से यमुना देवी की मूर्ति या फोटो की पूजा करने के बाद यमुनाष्टक का पाठ करें. इसके बाद पूरे दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखते हुए उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें. आज यमुना जी का पूरा पुण्यफल पाने के लिए उनके साथ भवगान श्रीकृष्ण की पूजा करना बिल्कुल न भूलें. यदि संभव हो तो आज यमुना तट पर शाम के समय जाकर शुद्ध देशी घी का दीया जलाकर आरती करें.

यमुना छठ का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार जिस यमुना के तट पर भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाएं की थीं, उसी यमुना को उनकी पत्नी माना गया है. यही कारण है कि पूरे ब्रजमंडल में मां यमुना की साधना-आराधना का बहुत ज्यादा महत्व है. इस पावन पर्व के दिन ब्रज के लोग बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ यमुना में स्नान और दीपदान करते हैं.

यमुना छठ का ज्योतिषीय महत्व

मां गंगा की तरह पवित्र और पूजनीय माने जाने वाली देवी यमुना की साधना-अराधना का न सिर्फ धार्मिक बल्कि ज्योतिषीय महत्व भी है. ज्योतिष के अनुसार जो व्यक्ति पूरे विधि-विधान से यमुना छठ वाले दिन यमुना जी में स्नान, पूजा एवं दान करता है, उस पर माता यमुना की पूरी कृपा बरसती है और उसे भविष्य में यम और शनि का भय नहीं रहता है.

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(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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