Yogini Ekadashi 2022 : किसी भी एकादशी व्रत में नहीं करनी चाहिए ये गलतियां, जानें योगिनी एकादशी की तिथि और महत्व

हर माह में दो एकादशी पड़ती हैं. हिंदू कैलेंडर के हिसाब से आषाढ़ मास (Ashada Month) शुरू हो चुका है. आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस बार योगिनी एकादशी का व्रत 24 जून को पड़ रहा है. एकादशी व्रत को श्रेष्ठ व्रतों में से एक माना गया है और मोक्षदायी कहा जाता है. इस​के नियम भी काफी कठिन माने जाते हैं. योगिनी एकादशी को लेकर शास्त्रों में लिखा है कि इस व्रत को विधिवत रहने से व्यक्ति के समस्त पाप मिट जाते हैं और उसे 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने का फल प्राप्त होता है. मृत्यु के बाद मृतक की आत्मा को नर्क की किसी यातना का भोग नहीं करना पड़ता है. वो सीधे विष्णुधाम को जाती है. अगर आप भी एकादशी का व्रत रखते हैं तो आने वाली योगिनी एकादशी के दिन यहां बताए जा रहे नियमों का पालन जरूर करें.

1. एकादशी व्रत के दिन स्नान करते समय जल में गंगा जल मिक्स करें और मां गंगा को प्रणाम करके स्नान करें. बालों को न धोएं. साथ ही साबुन और तेल का इस्तेमाल न करें.

2. एकादशी के दिन चावल नहीं खाए जाते हैं. अगर आपने व्रत रखा है, तो अपने परिवारीजनों को भी इस बात के लिए समझाएं और घर में किसी को भी उस दिन चावल न खाने के लिए प्रेरित करें.

3. अपने मन में किसी के प्रति बुरे भाव न न लाएं. न ही किसी को अपशब्द कहें और न ही किसी के दिल को ठेस पहुंचाएं. बड़ों का सम्मान करें और जरूरतमंदों की मदद करें.

4. एकादशी व्रत के दिन नारायण का मन में जाप करें. रात में जागरण करें और भगवान का जाप या कीर्तन करें. अगर आप थोड़े समय के लिए सोना चाहते हैं, तो जमीन पर बिस्तर बिछाकर सोएं.

5. एकादशी का व्रत द्वादशी के दिन खोला जाता है, इसलिए आप व्रत का पारण 25 जून को करें. इस दिन स्नान के बाद किसी ब्राह्मण को आदरपूर्वक भोजन कराएं. उन्हें सामर्थ्य के अनुसार दान दक्षिणा दें. इसके बाद सम्मानपूर्वक विदा करें. इसके बाद ही आप व्रत का पारण करें.

6. शास्त्रों में लिखा है कि एकादशी का व्रत मोक्ष दिलाने वाला है, लेकिन किसी भी व्यक्ति मोक्ष की स्थिति में तभी पहुंच सकता है, जब वो धर्म के मार्ग पर चले और अधर्म से बचे. आपने जाने अनजाने जो भी पाप किए हैं, वो एकादशी व्रत के प्रभाव से दूर हो जाते हैं, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि आप अधर्म करते रहें. इसलिए अगर हरि कृपा प्राप्त करनी है, तो धर्म की राह का पालन करें. एकादशी का व्रत पूरी निष्ठा और भक्ति के साथ रहें.

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