आषाढ़ अमावस्या पर शुभ संयोग: वृषभ राशि में बन रहे लक्ष्मी नारायण योग में स्नान-दान से बढ़ेगी समृद्धि!

आषाढ़ अमावस्या के दिन हल की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। अब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों? इसका क्या महत्व होता है? एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको इसी सवाल का जवाब देंगे। साथ ही जानेंगे इस वर्ष आषाढ़ मास की अमावस्या किस दिन पड़ रही है। इस दिन कौन सा शुभ योग बन रहा है और साथ ही जानेंगे इस दिन राशि अनुसार क्या कुछ दान करके आप अपने जीवन में पितरों का आशीर्वाद और सुख समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं।

सबसे पहले बात करें समय की और तिथि की तो, इस वर्ष आषाढ़ मास की अमावस्या या जिसे आषाढ़ अमावस्या या हल हारिणी अमावस्या भी कहते हैं वह 29 जून के दिन पड़ रही है।

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आषाढ़ अमावस्या मुहूर्त 2022 

आषाढ़ अमावस्या मुहूर्त (यहां दिया जा रहा मुहूर्त नई दिल्ली के लिए मान्य है आप अपने शहर का नाम डालकर उचित मुहूर्त की जानकारी यहां से प्राप्त कर सकते हैं)

जून 28, 2022 को 05:53:34 से अमावस्या आरम्भ

जून 29, 2022 को 08:23:03 पर अमावस्या समाप्त

आषाढ़ अमावस्या को क्यों कहते हैं हल हारिणी अमावस्या?

सनातन धर्म में अमावस्या की तिथि को बेहद शुभ माना गया है। इस दिन पितरों के लिए दान और तर्पण करने की विधि निर्धारित की गई है। कहा जाता है ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और हमारे जीवन में उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। हालांकि आषाढ़ मास की अमावस्या के दिन पितरों की पूजा के साथ-साथ कृषि उपकरणों की भी पूजा का विधान बताया गया है। यही वजह है कि इस अमावस्या को हल हारिणी अमावस्या भी कहते हैं। 

किसानों के लिए यह दिन बेहद ही महत्वपूर्ण होता है। इस दिन हल की पूजा की जाती है और साथ ही उन सभी उपकरणों की भी पूजा की जाती है जिनसे खेती में मदद मिलती है। इस दिन की पूजा कर किसान अच्छी फसल के लिए भगवान से कामना करते हैं।

हालांकि यहां इस बात का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है कि आषाढ़ अमावस्या के दिन खेतों में जुताई नहीं की जाती है। इस दिन केवल कृषि यंत्रों की पूजा की जाती है और अच्छी फसल की कामना की जाती है। 

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कृषि के महत्व को बताने वाली आषाढी अमावस्या के समय से ही वर्षा ऋतु का प्रारंभ होने लगता है। इस दौरान धरती नम पड़ती है और फसल की बुवाई के लिए यह समय उत्तम होता है। ऐसे में कुल मिलाकर आषाढ़ अमावस्या पितरों की आत्मा की शांति के साथ-साथ किसानों के लिए और उनकी फसल के लिए बेहद ही शुभ और उपयुक्त मानी जाती है।

जैसा कि हमने पहले भी बताया कि आषाढ़ मास की अमावस्या या अमावस्या तिथि पर पितरों की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसे में इस वर्ष इस विशेष तिथि को और भी खास बनाने के लिए इस दिन लक्ष्मी नारायण योग का शुभ संयोग बन रहा है। यह संयोग या योग कब बनता है और इस दिन किस विशेष वस्तु का दान करके आप इस दिन के महत्व को और बढ़ा सकते हैं यह जानने के लिए आगे पढ़ें ये लेख। 

कब बनता है लक्ष्मी नारायण योग?

ज्योतिष के अनुसार जब बुध और शुक्र ग्रह की युति होती है तो इससे बेहद ही शुभ योग लक्ष्मीनारायण योग बनता है। इस बेहद ही शुभ और फलदायी योग को महालक्ष्मी योग भी कहा जाता है। ज्योतिष के जानकार महालक्ष्मी योग को विशेष महत्वपूर्ण मानते हैं। माना जाता है कि जिन भी जातकों की कुंडली में इस योग का प्रभाव रहता है उन्हें जीवन में सभी तरह के सुख और वैभव की प्राप्ति बेहद ही आसानी से होती है। ऐसे में जून के महीने में बुध और शुक्र ग्रह वृषभ राशि में युति करने जा रहे हैं जिससे इस बेहद ही शुभ योग का निर्माण हो रहा है।

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आषाढ़ मास की अमावस्या का महत्व

हिंदू शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ मास को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में इस माह में आने वाली अमावस्या का भी महत्व बढ़ जाता है। इस महीने में धार्मिक कर्म, पूजा पाठ, दान पुण्य, उपासना, आदि करने से व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है। 

इसके अलावा माना जाता है कि यह महीना भगवान विष्णु को बेहद प्रिय होता है ऐसे में यदि इस दौरान भगवान विष्णु और उनके साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाए तो ऐसे व्यक्तियों के जीवन में सुख समृद्धि का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। इसके अलावा आषाढ़ मास की अमावस्या के दिन दान स्नान, और पितरों को याद करना भी शुभ फलदाई होता है।

आषाढ़ अमावस्या पर करें ये उपाय

इस बेहद ही खास दिन को और भी खास और शुभ बनाने के लिए आप आषाढ़ अमावस्या के दिन कुछ बेहद ही सरल उपाय कर सकते हैं। जैसे, 

इस दिन आप अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास कर सकते हैं और किसी गरीब को दान दक्षिणा दे सकते हैं। इस दिन का उपवास फलाहार रहकर किया जाता है। इसके अलावा आप चाहें तो इस दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद पीपल के पेड़ में जल चढ़ा सकते हैं और शाम के समय यहां दीपक भी जला सकते हैं। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा आप इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्तुओं आदि का दान भी कर सकते हैं। इससे भी आपके जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। आषाढ़ अमावस्या के दिन आटे की गोलियां बनाकर इन्हें मछलियों को खिला सकते हैं। इससे जीवन की परेशानियों का अंत होता है। इस दिन चींटियों को शक्कर मिला आटा खिलाने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

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आषाढ़ अमावस्या पर राशि अनुसार इन वस्तुओं का करें दान 

मेष राशि: चादर और तिल का दान करें।वृषभ राशि: वस्त्र और तिल का दान करें।मिथुन राशि: चादर और छाते का दान करें।कर्क राशि: साबूदाने और वस्त्रों का दान करें।सिंह राशि: कंबल और चादर का दान करें।कन्या राशि: तेल और उड़द की दाल का दान करें।तुला राशि: रुई, वस्त्र, राई, सूती वस्त्रों का दान करें।वृश्चिक राशि: खिचड़ी का दान करें।धनु राशि: चने की दाल का दान करें।मकर राशि: कंबल और पुस्तकों का दान करें।कुंभ राशि: साबुन, वस्त्र, और अन्न आदि का यथाशक्ति अनुसार दान करें।मीन राशि: साबूदाना, कंबल, और सूती कपड़ों का दान करें।

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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